Saturday , October 24 2020

खुदकुशी के लिए पति की प्रेमिका दोषी नहीं: HC

जबलपुर/भोपाल

दहेज उत्पीड़न के एक मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि किसी महिला पर महज इसलिए हत्या (सदोष मानव वध) का केस नहीं चलाया जा सकता कि खुदकुशी करने वाली महिला के पति और उसके बीच विवाहेत्तर संबंध थे। तीन साल पहले कथित उत्पीड़न के बाद एक महिला ने खुदकुशी कर ली थी।

यह घटना वर्ष 2015 की है। 14 दिसंबर को अविनाश सिंह नाम के शख्स की पत्नी प्रतिमा सिंह ने खुदकुशी कर ली थी। मौत से पहले पुलिस को दिए गए अपने बयान में प्रतिमा ने बताया था कि सतना में रहने वाली एक महिला से उनके पति के विवाहेत्तर संबंध हैं और इस वजह से पति उन्हें प्रताड़ित करते थे।

पुलिस ने मामले की जांच के बाद प्रतिमा के पति और उनकी कथित प्रेमिका के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल कोर्ट ने दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 (सदोष मानव वध) और 498-ए (सूइसाइड के लिए उकसाना) के तहत आरोप तय किए थे। इस मामले में सतना की महिला ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को जबलपुर हाई कोर्ट में चुनौती दी।

बुधवार को जस्टिस अंजुलि पालो की सिंगल बेंच ने महिला का नाम चार्जशीट से हटाने का आदेश दिया। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि महिला के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और सदोष मानव वध का केस नहीं चलाया जा सकता। हाई कोर्ट ने कहा कि केवल पीड़ित के पति से महिला के विवाहेत्तर संबंध होना केस चलाने का आधार नहीं हो सकता।

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