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बीजेपी के कई पुराने घावों पर नमक छिड़क गए राहुल गांधी

भोपाल

राहुल गांधी भोपाल आए तो बीजेपी के कई पुराने घावों पर नमक छिड़क गए. इसमें एक बात ये भी कि माल्या की तरह व्यापम और ई-टेंडरिंग के आरोपियों को भागने नहीं दिया जाएगा. साथ ही दावा किया कि एनपीए वसूला जाएगा और जनता को राहत दी जाएगी. बात रोज़गार की भी हुई. दरअसल ये सारी मुश्किलें अलग अलग धागों से आपस में जुड़ी हैं. ज़िक्र माल्या का था और संदर्भ घोटालेबाज़ों का. लेकिन मध्य प्रदेश के संदर्भ में राहुल की इस बात का कनेक्शन विदेशी निवेश और उद्योगपतियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है.

मध्य प्रदेश रोज़गार के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है. एक आंकड़े के मुताबिक प्रदेश में 23 लाख से ज़्यादा युवा बेरोज़गार हैं. बेरोज़गारी दूर करने के उद्देश्य से सरकार ने बीते कुछ सालों में निवेश को आकर्षित करने के इरादे से ग्लोबल इंवेस्टर समिट किया. बावजूद इसके पिछले तीन साल में मध्य प्रदेश में लगातार विदेशी पूंजी निवेश कम होता जा रहा है.

हैरानी इस बात की है कि साल 2017-18 में सिर्फ 28 मिलियन यूएस डॉलर्स का निवेश मध्य प्रदेश में आया. जबकि इस दौरान गुजरात, दिल्ली समेत प्रमुख राज्य एमपी से कई सौ गुना आगे नज़र आए. मध्य प्रदेश को बीमारू राज्य से उबारने का दावा करने वाली बीजेपी सरकार को आंकड़े मुंह चिढ़ाते हैं. ये पहली बार नहीं है कि दावों और वादों की स्याह हकीकत सामने आई हो. लगातार विदेशी निवेश को आकर्षित करने की कोशिश करने वाली बीजेपी सरकार की झोली अभी भी खाली है।

राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक पूरे देश में मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में साल 2017-18 में आया विदेशी निवेश सिर्फ बिहार-झारखंड और पूर्वी राज्यों के एक पायदान ऊपर है. जबकि इसी साल गुजरात, चेन्नई और दिल्ली जैसे राज्य कई गुना आगे हैं. मध्य प्रदेश में साल 2017-2018 में 28.16 मिलियन यू एस डॉलर्स का विदेशी निवेश आया जबकि इसी अवधि में ये गुजरात में 2091.01, चेन्नई में 3474.77 और नयी दिल्ली में 7655.52 मिलियन यू एस डॉलर्स का निवेश हुआ.

जानकारों की मानें तो प्रदेश में निवेश के लिए माहौल नहीं है. ना तो यहां बुनियादी सुविधाएं हैं और ना ही सुरक्षा. ऐसे में विदेशी निवेश आकर्षित करने के वादे करने भर से कुछ होगा नहीं. प्रदेश में सिंगल विंडो सिस्टम और कार्यप्रणाली में बदलाव का दावा सिर्फ वादा बनकर रह गया. यही वजह है कि प्रदेश में विदेशी निवेश दिन ब दिन कम होता जा रहा है और एनपीए ज़्यादा.

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