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MP: टेंपरेरी सीएम हैं शिवराज! परमानेंट होने के लिए कर रहे हैं ये कवायद

नई दिल्ली ,

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के मानधाता विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पुनासा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह उपचुनाव शिवराज को टेम्परेरी से परमानेंट करने के लिए है.क्या आप लोग मुझे परमानेंट करने को तैयार है? इससे साफ जाहिर है कि मध्य प्रदेश की 28 सीटों पर होने वाला चुनाव शिवराज के सियासी भविष्य का फैसला करने वाला है.

सूबे की 28 सीटों पर होने वाला चुनाव तय करेगा कि सत्ता की कमान शिवराज के हाथों में रहेगी या फिर कमलनाथ वापसी करेंगे. यही वजह है कि कांग्रेस और बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी है. शिवराज सिंह चौहान अपनी सीएम की कुर्सी को परमानेंट तौर पर मजबूत करने के लिए एक के बाद एक कवायद कर रहे हैं. इसी कड़ी में उन्होंने खंडवा में 44 करोड़ रुपयो के विकास योजनाओं का आगाज किया.

किसानों पर मेहरबान
एमपी की जिन 28 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने हैं, इनमें अधिकांश सीटें ग्रामीण इलाके से आती हैं और कृषि कार्य से जुड़े लोग ज्यादा मतदाता हैं. यही वजह है कि शिवराज चौहान खुद को किसान हितैषी बताने के लिए एक के बाद फैसले ले रहें है. शिवराज सरकार ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के खातों में मुआवजा राशि डाली है. किसानों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना की ही तरह राज्य के किसानों को चार हजार रूपये प्रतिवर्ष अतिरिक्त सम्मान निधि देने का ऐलान किया गया है. इस तरह से किसानों को अब 10 हजार सालाना मिलेगा. इसके अलावा किसानों को बिना ब्याज दर पर फसल ऋण उपलब्ध कराने की योजना शुरू की है.

युवाओं को साधने का दांव
उपचुनाव से पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने युवाओं को साधने का दांव चला है. उन्होंने प्रदेश की सरकारी नौकरियों को सिर्फ और सिर्फ प्रदेश के युवाओं के लिए आरक्षित कर दिया है. शिवराज ने सरकारी नौकरी में एमपी के लोगों के लिए 100 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है. इसके अलावा शिवराज अधिकारियों को सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों पर भर्ती का निर्देश दिया. गृह, राजस्व, जेल, लोक निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विभागों में खाली पड़े पद फौरन भरे जाएं. बता दें कि उपचुनाव वाले क्षेत्रों में युवा मतदाताओं की बड़ी भागेदारी है.

आदिवासियों को साहूकारों से मुक्ति
मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने आदिवासी समुदाय को साधने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने प्रदेश में साहूकारों के कर्ज से आदिवासी समुदाय को मुक्ति दिलाने के लिए कानून बनाया है. सरकार ने 15 अगस्त 2020 से पहले के सभी कर्जे आदिवासियों के माफ कर दिए गए हैं, जिन्हें साहूकार अब नहीं वसूल सकेंगे. इसके अलावा प्रदेश में बिना लाइसेंस के कोई साहूकार किसी व्यक्ति को कर्ज नहीं दे सकेगा और ना ही उसकी वसूली कर सकेगा. सिर्फ रजिस्टर्ड साहूकार ही कर्ज दे सकेंगे. सरकार ने अनुसूचित जनजाति मुक्ति विधेयक और साहूकारी संशोधन विधेयक 2020 को पारित कराया है. ऐसे में अब कोई साहूकार दबाव डालता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी.

ग्वालियर-चंबल एक्सप्रेस वे
मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में 16 सीटें ग्वालियर-चंबल इलाके की है. यह वही इलाका है जिसने 2018 के विधानसभा चुनाव में अपने नतीजों से बीजेपी के लगातार चौथी बार सत्ता में काबिज होने के सपने पर पानी फेर कर कांग्रेस पार्टी के वनवास को खत्म कर कमलनाथ को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा दिया था.

शिवराज अब इस इलाके पर कुछ खास मेहरबान हैं, जिसके तहत उन्होंने चंबल एक्सप्रेस-वे के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है. एमपी के मुरैना से राजस्थान के कोटा तक 352 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेस-वे बनाया जाना है. चंबल एक्सप्रेस वे, से 3 राज्य मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को आपस में जोड़ा जाएगा. यह एक्सप्रेस वे 8 लेन का होग जो चंबल नदी के किनारे बनेगा.

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