कमलनाथ से मुलाकात के बाद अफसर का इस्तीफा, चुनाव लड़ने की चर्चा

भोपाल

राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रमेश सिंह ने वीआरएस के लिए शासन में अर्जी दी है। चर्चा है कि सोमवार को रमेश सिंह ने पूर्व सीएम कमलनाथ से मुलाकात की थी। ऐसे में चर्चा है कि वह चुनावी मैदान में उतरेंगे। कमलनाथ की तरफ से आश्वासन मिलने के बाद ही उन्होंने इस्तीफा दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि रमेश सिंह अनूपपुर से चुनाव लड़ेंगे और बीजेपी के बिसाहू लाल सिंह को टक्कर देंगे। हालांकि कांग्रेस ऐसी खबरों को खारिज कर रही है।

दरअसल, रमेश सिंह ने राज्य शासन को अपना इस्तीफा मंगलवार को भेजा था, जो मंजूर हो चुका है। रमेश सिंह के इस्तीफे के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। चर्चा है कि रमेश सिंह अनूपपुर सिंह चुनाव लड़ेंगे। यह सीट अनूसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहां से बिसाहू लाल सिंह बीजेपी के उम्मीदवार हैं। शिवराज सरकार में बिसाहूलाल सिंह खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री हैं। वह कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए हैं।

कांग्रेस ने घोषित कर दिए हैं उम्मीदवार
हालांकि रमेश सिंह को लेकर जो चर्चाएं, अगर वह सही है, तो कांग्रेस में भी बगावत बढ़ सकती है। कांग्रेस ने अनूपपुर के लिए पहले ही प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। कांग्रेस ने अनूपपुर से विश्वनाथ सिंह कुंजाम को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में रमेश को तभी टिकट मिल सकता है, जब कुंजाम का पता कट जाए।

उन्होंने फोन पर मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि अनूपपुर के जनता की सेवा करनी है और चूंकि मैं पद पर रहकर जनता की उस प्रकार से सेवा नहीं कर पा रहा था, जिसके चलते मैं इस्तीफा देकर खुल कर मैदान में आ गया हूं। उपचुनाव में कांग्रेस के विश्वनाथ को टिकट दिए जाने के सवाल पर कहा कि कमलनाथ जी से पुनर्विचार का आश्वासन मिला है। हम पार्टी के अनुशासित सिपाही हैं। निर्दलीय लड़ने के सवाल को टालते हुए कहा कि इस पर अभी कोई विचार नहीं हुआ है।

कांग्रेस ने किया खारिज
वहीं, इन चर्चाओं पर एमपी कांग्रेस ने ट्वीट कर सफाई दी है। कांग्रेस ने कहा है कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया चैनलों पर अनूपपुर के प्रत्याशी बदलने की भ्रामक और असत्य खबरें चलाई जा रही है। कांग्रेस ने अनूपपुर के लिए विश्वनाथ सिंह कुंजाम को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। अनूपपुर के प्रत्याशी पर न तो कोई पुनर्विचार हो रहा है और न ही कोई पुनर्विचार होगा।

चुनाव लड़ने के लिए बेचैन थे रमेश
दरअसल, अधिकारी रमेशा ने 14 साल 4 महीने तक सरकारी सेवा में रहे हैं। वह राजनीति में कदम रखने के लिए पिछले 3 वर्षों से छटपटा रहे थे। 2018 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने टिकट के लिए कोशिश की थी। लेकिन सफल नहीं हुए। अब बात पक्की होने के बाद उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दिया है।

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