सिंधिया के करीबी मंत्री के क्षेत्र से बीजेपी को राम का सहारा

सागर।

एमपी में विधानसभा के उपचुनावों के लिए तारीखों का ऐलान नहीं हुआ, लेकिन राजनीतिक दांव-पेच शुरू हो चुके हैं। BJP के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया चनाव प्रचार की कमान संभाल चुके हैं तो कांग्रेस के लिए पूर्व सीएम कमलनाथ मोर्चा संभाल रहे हैं। सागर जिले की सुरखी विधानसभा उपचुनावों में हॉट सीट मानी जा रही है, क्योंकि यहां से सिंधिया के कट्टर समर्थक और प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत बीजेपी के उम्मीदवार हैं।

सुरखी के मौजूदा राजनीतिक माहौल की बात करें तो यहां फिलहाल अकेली बीजेपी ही चुनाव लड़ती दिख रही है। नए-नवेले भाजपाई बने गोविंद सिंह राम के सहारे चुनावी नैया पार लगाने की कोशिश कर रहे हैं तो कांग्रेस के लिए चुनाव का पहला पड़ाव पार करना ही मुश्किल हो रहा है। पार्टी को राजपूत से मुकाबले के लिए अभी तक कोई उम्मीदवार ही नहीं मिला।

गोविंद सिंह राजपूत क्षेत्र में रामशिला पूजन यात्रा के अपने समर्थकों को गोलबंद करने का पहला चरण पूरा कर चुके हैं। कोरोना गाइडलाइन के पालन पर ध्यान न दें तो राम शिला पूजन यात्रा में जुटी भीड़ उनके लिए राहत पहुंचाने वाली है। यात्रा के दौरान जगह-जगह महिलाएं भी इसमें बड़ी संख्या में शामिल हुईं। राजपूत चुनाव में राममय हो चुके माहौल को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। समस्या यह है कि उनके पास भी इसके अलावा कोई खास मुद्दा नहीं है।

इधर, कांग्रेस नेता रह-रह कर राजपूत पर गद्दारी का आरोप तो लगा रहे हैं, लेकिन क्षेत्र में उनकी सक्रियता न के बराबर है। राजपूत के साथ बड़ी तादाद में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीजेपी ज्वॉइन करने से कांग्रेस के लिए मुश्किलें ज्यादा हैं। समस्या यह है कि कांग्रेस अब तक अपने उम्मीदवार का ही फैसला नहीं कर पाई है।

राजपूत से दो-दो हाथ करने के लिए कांग्रेस में दर्जनों नामों पर मंथन हो रहा है, लेकिन पार्टी बीजेपी के असंतुष्ट नेताओं पर भी डोरे डाल रही है। कांग्रेस के शीर्ष नेता भी बीजेपी में सेंधमारी के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। इनमें सुरखी से बीजेपी के टिकट पर राजपूत को पटखनी देने वाली पूर्व विधायक पारुल साहू और सुरखी विधानसभा के कद्दावर नेता राजेन्द्र सिंह मोकलपुर शामिल हैं। इनमें से कोई भी कांग्रेस में आ जाए तो बीजेपी की जीत की राह मुश्किल हो सकती है।

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