भोपाल
भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने 25 फरवरी 2026 को देशभर में “विरोध दिवस” मनाने की घोषणा की है। यह निर्णय पुरी में आयोजित 21वें अखिल भारतीय अधिवेशन में लिया गया। बीएमएस की सभी इकाइयाँ इस दिन जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन, रैली, गेट मीटिंग और काली पट्टी धारण कर केंद्र व राज्य सरकारों को ज्ञापन सौंपेंगी।
बीएमएस के अखिल भारतीय मंत्री रामनाथ गणेश एवं मध्यप्रदेश के महामंत्री कुलदीप गुर्जर ने कहा कि संगठन लंबे समय से श्रमिकों की ज्वलंत समस्याओं को सरकार के समक्ष उठाता रहा है, लेकिन अब तक अपेक्षित ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मानदेय और वेतन को लेकर आक्रोश संघ ने आरोप लगाया कि लाखों मिड-डे मील और आशा कार्यकर्ता अत्यंत कम मानदेय पर कार्य कर रही हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पाँच दशकों की सेवा के बाद भी ‘योजना कर्मी’ का दर्जा दिया जा रहा है, जबकि उनसे प्रतिदिन 10 घंटे से अधिक कार्य लिया जाता है। राष्ट्रीय वस्त्र निगम (NTC) की मिलों के श्रमिकों को कोरोना काल के बाद से केवल 50% वेतन मिल रहा है और कई महीनों का वेतन बकाया है। रांची स्थित हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (HEC) के कर्मचारियों को भी लंबे समय से वेतन नहीं मिलने का मुद्दा उठाया गया।
विद्युत कर्मचारियों द्वारा निजीकरण के विरोध और ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम 1000 रुपये पेंशन बढ़ाने की मांग भी प्रमुख रूप से रखी गई है। बैंक कर्मचारी पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। प्रमुख मांगें बीएमएस ने श्रम कानूनों का सार्वभौमिक पालन सुनिश्चित करने, औद्योगिक संबंध संहिता 2020 एवं व्यावसायिक सुरक्षा संहिता 2020 में संशोधन, भारतीय श्रम सम्मेलन की तत्काल बैठक बुलाने और त्रिपक्षीय समितियों के पुनर्गठन की मांग की है। संगठन ने ईएसआईसी की वेतन सीमा 21 हजार से बढ़ाकर 42 हजार और ईपीएफ की सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 30 हजार करने की भी मांग की है। बोनस अधिनियम 1965 के तहत पात्रता सीमा बढ़ाने, योजना एवं संविदा कर्मियों के नियमितीकरण तथा सामान्य भर्ती पर लगे प्रतिबंध हटाने की भी मांग उठाई गई है। बीएमएस ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की है कि श्रमिकों के हित और राष्ट्रीय विकास को ध्यान में रखते हुए लंबित मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
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