भोपाल ।
यह कथा 21 नवंबर से 29 नवंबर तक चलेगी । इस कथा का आयोजन पं रामगोपाल तिवारी द्वारा किया जा रहा है कथा वाचक पं.रामदुलारे पाठक ने कथा प्रसंग में कहा कि मल्ल–युद्ध की वीर परंपरा और सुदामा–श्रीकृष्ण के दिव्य मिलन अद्वितीय है । उन्होंने श्रोताओं को संदेश दिया की शक्ति, मित्रता और प्रेम का अद्वितीय प्रतीक है । यह कथा भेल क्षेत्र के गीत गणेश विलाा मंदिर प्रांगण अयोध्या बॉय पास में चल रही है इसका समापन शुक्रवार को होगा ।
यह बड़ा संदेश है कि मल्ल–युद्ध (कुश्ती) प्राचीन भारत की एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जहाँ वीर योद्धा शक्ति, धैर्य और कौशल की परीक्षा देते थे। यह केवल शारीरिक बल का खेल नहीं, बल्कि संयम, सम्मान और चरित्र की भी कसौटी माना जाता था। महाभारत में भी भीम और जरासंध, भीम और दुश्शासन जैसे अनेक मल्ल–युद्ध के उल्लेख मिलते हैं, जो बल के साथ धर्म और साहस का प्रतीक बने। सुदामा–श्रीकृष्ण मिलाप का प्रसंग सुदामा और श्रीकृष्ण का मिलन मित्रता के सबसे पवित्र उदाहरणों में से एक है।
गरीबी में जीवन बिता रहे सुदामा अपने बाल–मित्र कृष्ण से मिलने द्वारका पहुँचे। कृष्ण ने उन्हें देखते ही हर्ष से उनके चरण धोए, गले लगाया और सम्मान दिया। सुदामा ने कुछ नहीं माँगा, फिर भी कृष्ण ने उनकी झोपड़ी को महल में बदल दिया। यह प्रसंग बताता है कि सच्ची मित्रता में लोभ नहीं होता,दयालुता और प्रेम सर्वोच्च धन हैं,ईश्वर भक्त की भावना समझते हैं ।
