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भोपाल तमिल संगम द्वारा पोंगल 2026 का भव्य आयोजन

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भोपाल,

उलगत तमिल संगम, मदुरै तथा ऑर्गनाइजेशन ऑफ ऑल इंडिया तमिल संगम्स, चेन्नई से संबद्ध भोपाल तमिल संगम (बीटीएस) ने कैरियर कॉलेज ऑडिटोरियम, गोविंदपुरा, भेल, भोपाल में पोंगल 2026 के भव्य आयोजन का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह आयोजन मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में स्थापित हुआ।

मध्य भारत में तमिल भाषा, संस्कृति और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित अग्रणी संस्था भोपाल तमिल संगम ने रविवार

को इस ऐतिहासिक आयोजन का समापन किया। इस अवसर पर नागरिकों, गणमान्य अतिथियों, कलाकारों, विद्वानों और तमिल प्रवासी समुदाय के सदस्यों की व्यापक सहभागिता देखने को मिली।

आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भोपाल तमिल संगम के अध्यक्ष पी. राजू ने कहा कि पोंगल 2026 केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय राष्ट्र को परिभाषित करने वाली एकता है

पोंगल 2026 की भव्यता और राष्ट्रीय महत्व को शासन, प्रशासन, शिक्षा, उद्योग, विज्ञान, संस्कृति और नागरिक समाज से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने और ऊँचाई प्रदान की। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप मे श्री शंकर विश्वनाथन, उपाध्यक्ष, वीआईटी विश्वविद्यालय; तथा थिरु ए. के. एस. विजयन, नई दिल्ली में तमिलनाडु सरकार के विशेष प्रतिनिधि शामिल थे।

इसके अतिरिक्त अनेक विशिष्ट अतिथियों ने भी समारोह की गरिमा बढ़ाई, जिनमें थिरु एस. कुमनारासन, संस्थापक, लेमुरिया फाउंडेशन, मुंबई; अध्यक्ष, तमिल फाउंडेशन, बेंगलुरु एवं सलाहकार, ऑल इंडिया तमिल संगम फेडरेशन; डॉ. जी. वेंकटेश, प्रधान वैज्ञानिक, आईसीएआर–एनआईएचएसएडी, भोपाल; थिरु एस. शिवशंकरमूर्ति, उप महाप्रबंधक (एनसीजेड), एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड, भारत सरकार; डॉ. अरुण राज टी., क्षेत्रीय निदेशक (केंद्रीय क्षेत्र), भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार; थिरु के. एम. कुमार, निदेशक, कुमरण इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज; थिरु कार्तिकेयन जयपाल (जैकी), निदेशक, दीपक फास्टनर्स लिमिटेड (उन्ब्राको); श्री मनीष राजोरिया, चेयरमैन, कैरियर कॉलेज, भोपाल; श्री विजय सिंह कटैत, अध्यक्ष, भेल भारतीय मजदूर संघ यूनियन; तथा श्रीमती श्यामला सोमन, उपाध्यक्ष, एसएसएम; अध्यक्ष, एबीएएसएस; एवं राष्ट्रीय महासचिव, मातृ भारती पंचजन्यम भारतम् शामिल थे। इन सभी की सामूहिक उपस्थिति ने आयोजन के राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित किया और सांस्कृतिक संघवाद, सहकारी शासन तथा समावेशी विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाया।

पोंगल 2026 को विशेष रूप से तमिलनाडु और मध्य प्रदेश के बीच एक सांस्कृतिक सेतु के रूप में परिकल्पित किया गया था, ताकि तमिल कला, व्यंजन, भाषा और परंपराओं की गहराई को अखिल भारतीय दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।

औपचारिक गरिमा और प्रथम सत्र में औपचारिक स्वागत के पश्चात भोपाल के विद्यार्थियों और स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। द्वितीय सत्र में गणमान्य अतिथियों का आगमन हुआ तथा दीप प्रज्वलन, तमिल ताई वाज़्थु और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम को गरिमामयी प्रारंभ मिला। अतिथियों के सम्मान के पश्चात पी. राजू ने स्वागत भाषण दिया। इसके बाद विशिष्ट अतिथियों के संबोधन हुए कार्यक्रम का समापन भोपाल तमिल संगम के महासचिव श्री ए. स्वामी दुरै के धन्यवाद ज्ञापन और कलाकारों को स्मृति चिह्न प्रदान करने के साथ हुआ।

पोंगल 2026 का एक प्रमुख आकर्षण तमिलनाडु सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग से आए प्रतिष्ठित कलाकारों का दल रहा, जिनकी प्रस्तुतियों ने भोपाल में तमिल शास्त्रीय और लोक परंपराओं की प्रामाणिक आत्मा को सजीव कर दिया। भरतनाट्यम, करगट्टम और जीवंत लोक नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों से भरपूर सराहना प्राप्त की।

फसल पर्व की भावना के अनुरूप सभी अतिथियों के लिए प्रामाणिक तमिल व्यंजनों का भव्य भोज आयोजित किया गया, जिसमें पारंपरिक पोंगल व्यंजन, पर्व विशेष पकवान और क्षेत्रीय स्वाद शामिल थे। तमिल कला, साहित्य और विरासत पर आधारित सांस्कृतिक प्रदर्शनियों ने भी आयोजन को और समृद्ध किया।

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भोपाल तमिल संगम के अध्यक्ष श्री पी. राजू ने कहा कि पोंगल 2026 समुदाय के लिए गर्व का क्षण था, उन्होंने कहा कि यह उत्सव केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एकता, कृतज्ञता और साझा विरासत की पुनर्पुष्टि है, और मध्य प्रदेश के हृदय में तमिलनाडु की परंपराओं को प्रस्तुत करना उनके लिए सम्मान की बात है।

महासचिव ए. स्वामी दुरै ने कहा कि संगम का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि स्थायी सांस्कृतिक सेतु बनाना और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना है।

जैसे ही कैरियर कॉलेज ऑडिटोरियम में संगीत, नृत्य और साझा उल्लास की गूंज शांत हुई, पोंगल 2026 अपने पीछे आनंद, समावेशिता और राष्ट्रीय एकता की अमिट विरासत छोड़ गया। यह आयोजन इस बात का सशक्त प्रमाण बना कि जब परंपराएँ साझा की जाती हैं, तो वे राष्ट्र की सांस्कृतिक संरचना को और मजबूत बनाती हैं। माननीय राज्यपाल की सहभागिता ने इस उत्सव को तमिलनाडु और मध्य प्रदेश के बीच एक सांस्कृतिक सेतु के रूप में स्थापित किया, जो ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की सच्ची भावना को साकार करता है

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