भोपाल। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय (पीसीसी) में आयोजित की गई आदिवासी कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी और जिला अध्यक्षों की महत्वपूर्ण बैठक में कई अहम राजनीतिक मायने देखने को मिले। इस पूरी बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच की जुगलबंदी और केमिस्ट्री सियासी गलियारों में खासी चर्चा का विषय बनी रही।
कई मौकों पर दोनों दिग्गज नेता एक साथ बैठे हुए और गंभीर मुद्दों पर आपस में गहन मंत्रणा करते हुए नजर आए। बैठक संपन्न होने के बाद मीडिया से मुखातिब हुए पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज्य और केंद्र सरकार पर तीखे हमले बोले। पटवारी ने संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश और केंद्र की सरकार ने पिछले 25 वर्षों में करीब 1 लाख 26 हजार हेक्टेयर आदिवासियों की जमीन को कौड़ियों के दाम निजी लोगों को बेच दिया है। उन्होंने कहा कि सिंगरौली, उमरिया, झाबुआ, रतलाम, धार, पन्ना और छतरपुर जैसे आदिवासी बहुल जिलों में कॉरपोरेट्स को फायदा पहुंचाने के लिए आदिवासियों की जमीनों का अंधाधुंध अधिग्रहण किया जा रहा है, जिसे कांग्रेस अब बर्दाश्त नहीं करेगी और इन स्थानों पर जाकर आदिवासियों की जमीन बचाने के लिए जमीनी स्तर पर कड़ा संघर्ष करेगी। पीसीसी चीफ ने स्पष्ट किया कि जल, जंगल और जमीन का असली मालिक सिर्फ और सिर्फ आदिवासी समाज है।
सिंगरौली में आदिवासियों की जमीन छीनकर और गलत तरीके से अधिग्रहण के जरिये उद्योगपति अडाणी को फायदा पहुंचाने की कोशिशों का कांग्रेस पुरजोर विरोध करेगी। जीतू पटवारी ने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी इस शोषण के खिलाफ नए सिरे से शंखनाद करने जा रही है, जिसकी पूरी रणनीति बनाने और आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने की जिम्मेदारी विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल और विधायक विक्रांत भूरिया की तीन सदस्यीय विशेष समिति को सौंपी गई है।
यह कमेटी जो भी खाका तैयार करेगी, पूरी कांग्रेस पार्टी उसी रणनीति पर आगे काम करेगी। इसके साथ ही उन्होंने एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा किया और कहा कि मध्य प्रदेश में आज सबसे ज्यादा बलात्कार आदिवासी बहनों के साथ हो रहे हैं। बदहाली के कारण सबसे अधिक पलायन और भीषण गरीबी इसी वर्ग में है।
