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एडवोकेट्स एक्ट में संशोधन के खिलाफ MP के वकीलों ने खोला मोर्चा, जानिए अमेंडमेंट बिल के किन प्वाइंट पर है विरोध

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उज्जैन

देशभर में कई कानून से जुड़े कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सबसे पहले क्रिमिनल जस्टिट में तीन बदलाव देखने को मिले। जिसमें आईपीसी की जगह भारतीय न्याय संहिता, सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने ली। इसके बाद अब केंद्र की मोदी सरकार एडवोकेट्स एक्ट में संसोधन कर नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए अधिवक्ता संसोधन बिल 2025 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है।

केंद्र सरकार के इस कदम से वकील वर्ग आक्रोशित हो गया है। उज्जैन जिले में अभिभाषक संघ का शुक्रवार को प्रदर्शन देखने को मिला। यह प्रदर्शन अधिवक्ता संशोधन विधेयक 2025 में प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ था। जिला अभिभाषक संघ के पैनल तले अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष और सीनियर वकीलों के साथ 100 से अधिक वकील लामबंद हुए।

वकीलों ने किया कलेक्ट्रेट ऑफिस का घेराव
न्यायालय परिसर से नारेबाजी करते हुए सभी वकील जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। कलेक्टर ऑफिस परिसर में उग्र नारे लगाते हुए वकीलों ने अधिवक्ता संशोधन विधेयक लागू न करने की मांग की। इस दौरान एसडीएम लक्ष्मी नारायण गर्ग वकीलों के बीच पहुंचे और उनकी बातें सुनी।

राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
जिला अभिभाषक संघ अध्यक्ष अशोक यादव के नेतृत्व में महामहिम राष्ट्रपति महोदय के नाम एक ज्ञापन सोपा गया। ज्ञापन के माध्यम से बताया गया कि अधिवक्ता संशोधन विधेयक से वकीलों का अहित होगा। इस विधेयक में ऐसे कई प्रावधान है जो वकीलों के खिलाफ है। उनका कहना है कि इस विधेयक के माध्यम से उनके संवैधानिक अधिकारों को सीमित किया जा रहा है। इस बिल के प्रस्तावित संशोधनों में वकीलों की आजादी और संगठन के अधिकारों को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

इन बिंदुओं पर हो रहा विरोध
एडवोकेट्स अमेंडमेंट बिल का विरोध कर रहे जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष अशोक यादव ने वे प्रमुख बिंदु बताए जिनका वे विरोध कर रहे हैं।
– बिल में प्रावधान किया गया है कि विदेशी वकील और विदेशी फर्म भारत में पैरवी कर सकेंगे।
– इसके अलावा कॉर्पोरेट में नौकरी करने वाले विधि स्नातकों को भी पैरवी की अनुमति मिलेगी।
– बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य अधिवक्ता परिषद में निर्वाचित सदस्यों के अलावा तीन शासकीय सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी।
– वकीलों के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में सेवा में कमी को लेकर परिवाद दायर किया जा सकेगा।
– अधिवक्ता किसी भी स्थिति में कार्य से विरत नहीं रह सकेंगे।
– न्यायालय में वकील द्वारा अभद्र व्यवहार करने पर जुर्माना और सनद निलंबित की जा सकेगी।

मामले में एसडीएम लक्ष्मी नारायण गर्ग ने ज्ञापन लिया और कहा कि वकीलों की मांगों से संबंधित ज्ञापन को उचित माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदय तक पहुंचाया जाएगा।

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