भोपाल। राजधानी भोपाल के इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी में पिछले दिनों प्रशासन द्वारा की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई के खिलाफ मंगलवार को प्रभावित रहवासियों ने नगर निगम कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। ४० वर्षों से वहाँ रह रहे बेघर परिवारों का आरोप है कि सरकारी पट्टे होने और प्रशासन द्वारा वैकल्पिक आवास देने के आश्वासन के बावजूद, शुक्रवार को अचानक उनके मकान और दुकानें जमींदोज कर दिए गए।
इस एकतरफा कार्रवाई के कारण ५५ मकान और ७० दुकानें टूट चुकी हैं, जिससे ३०० से अधिक लोग इस भीषण गर्मी और आने वाले मानसून के बीच खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। पीड़ितों ने अपनी मांगों को लेकर महापौर और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल पुनर्वास और आवास आवंटन की गुहार लगाई है। कार्रवाई का शिकार हुए परिवारों की आपबीती बेहद हृदयविदारक है। प्रभावित सरोज मेहरा ने रोते हुए बताया कि उनका घर और दुकान दोनों तोड़ दिए गए, जिससे उनका रोजगार छिन गया है।

पिछले तीन दिनों से उनके घर में चूल्हा तक नहीं जला है और वे अपने १० साल के पोते को लेकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं। वहीं, ज्योति यादव ने बताया कि उनके पति बीमार हैं और एक छोटी बेटी है; प्रशासन ने नया घर मिलने से पहले पुराना मकान न तोड़ने का वादा किया था जो पूरी तरह झूठा निकला। एक अन्य प्रभावित केशव गौर ने दर्द बयां करते हुए कहा कि अधिकारियों ने सामान हटाने तक का वक्त नहीं दिया, जिससे उनके गहने, राशन और पूरी गृहस्थी का सामान मलबे में दब गया। अब उनके पास सिर्फ वही कपड़े बचे हैं, जो उन्होंने पहन रखे हैं।
पीड़ित परिवारों की प्रमुख मांगें
जिन परिवारों के मकान तोड़े गए हैं, उन्हें तत्काल वैकल्पिक या अस्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए।’प्रधानमंत्री आवास योजना’ (PMAY) के तहत प्राथमिकता के आधार पर फ्लैट आवंटित किए जाएं।जिन दुकानदारों के रोजगार छिने हैं, उन्हें व्यवसाय के लिए वैकल्पिक दुकानें दी जाएं। प्रभावित परिवारों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।पुनर्वास स्थल पर बिजली, पानी, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
