भोपाल। राजधानी में मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने के हालिया प्रस्ताव का तीखा विरोध हुआ। वरिष्ठ समाजसेवी राजेंद्र कोठारी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विभिन्न धर्मों और समाजों के प्रमुख पदाधिकारी एकजुट हुए। बैठक में मुख्य रूप से हाजी मोहम्मद हारून, महेंद्र शर्मा, फादर आनंद मुतुंगल, शैलेंद्र शैली, सुनील बोरसे, एडवोकेट मोहम्मद कलीम खान, हिफजुर्रहमान सिद्दीकी, हाजी मोहम्मद इमरान हारून, हाजी हनीफ अय्यूबी और मोहम्मद ज़ुबैर सहित कई प्रबुद्धजन शामिल हुए।
सभी वक्ताओं ने विश्वविद्यालय की कार्य परिषद (एग्जीक्यूटिव काउंसिल) द्वारा लाए गए नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया। बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम पर स्थापित इस प्रतिष्ठित संस्थान का नाम बदलने की कोशिश देश की आजादी के नायकों का सीधा अपमान है। मंच के पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि भारतीय इतिहास में अब तक ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता, जहाँ किसी स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर रखे गए संस्थान का नाम बदला गया हो; ऐसा करना समाज में एक बेहद गलत और नकारात्मक परंपरा की शुरुआत करेगा।
उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में ‘भोपाल विश्वविद्यालय’ का नाम बदलकर ‘बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय’ रखने का ऐतिहासिक फैसला सर्वधर्म सहमति और आपसी भाईचारे के आधार पर लिया गया था। ऐसे में इस निर्णय को पलटना शहर की ऐतिहासिक विरासत और सद्भाव के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। इस वैचारिक विरोध को आगे बढ़ाते हुए सर्वधर्म सद्भावना मंच ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि जल्द ही मंच का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विश्वविद्यालय के कुलपति से मुलाकात कर इस संबंध में एक विरोध ज्ञापन सौंपेगा। इसके साथ ही, इस संवेदनशील मामले में केंद्र के स्तर से हस्तक्षेप की मांग को लेकर देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी आधिकारिक पत्र भेजा जाएगा।
