Wednesday , September 23 2020

अब एयरलाइन कंपनियां चार्ज तय करने के लिए स्वतंत्र : जयंत सिन्हा

नई दिल्ली

एयरलाइन कंपनियां टिकट, बैगेज एवं मील (नाश्ता और भोजन) के लिए मर्जी से चार्ज करने को आजाद हैं। राज्य सभा में प्रश्न काल के दौरान उठे सवालों के जवाब में नागरिक उड्डयन (सिविल एविएशन) राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि सरकार ने विमान किराए को कुछ हद तक कानूनी बंधनों से मुक्त (डीरेग्युलेट) कर दिया है। इसलिए अब एयरलाइन कंपनियां चार्ज तय करने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि यह यात्री और एयरलाइन कंपनी के साथ हुए कॉन्ट्रैक्ट पर निर्भर करता है कि किस सुविधा के लिए कितना चार्ज लिया जाए। मंत्री के मुताबिक, एयरलाइन कंपनियों द्वारा पसंदीदा सीटों के लिए अतिरिक्त पैसे वसूलना गलत नहीं है।

इंडिगो का हवाला
दरअसल, संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन बुधवार को राज्य सभा में छत्तीसगढ़ से कांग्रेस सांसद छाया वर्मा ने 29 जून को इंडिगो एयरलाइन में आगे की सीट के लिए अतिरिक्त पैसे वसूलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा, 29 जून को 5:30 बजे की फ्लाइट दिल्ली से रायपुर गई। उसमें सामने की पूरी सीट खाली थी। मेरे पास बिजनस क्लास का टिकट था, फिर भी सामने की सीट नहीं दी गई। लेकिन, फ्लाइट टेक ऑफ करते ही उन सीटों को 600-600 रुपये में बेचने का अनाउंसमेंट हुआ। मेरा प्रश्न यह है कि क्या वैध टिकट होने के बाद भी यात्रियों से सीट के एवज में अतिरिक्त पैसे लेना जायज है? अगर जायज है तो उसे टिकट में क्यों समाहित नहीं किया जाता?’ सभापति एम. वेंकैया नायडू ने भी इसे एक गंभीर प्रश्न बताते हुए सदस्यों से मंत्री का जवाब ध्यान से सुनने को कहा।

अतिरिक्त पैसे देने ही पड़ेंगेः सिन्हा
इस पर विभागीय राज्य मंत्री ने कहा, ‘जब एक पैंसेंजर और एक एयरलाइन के बीच में कॉन्ट्रैक्ट होता है तो उसमें कुछ नियम एवं शर्तें स्पष्ट की जाती हैं। इसमें एक नियम यह है कि आप किस किस्म की सीट लेना चाहते हैं। मिडल सीट सबसे कम दाम की होती है। अगर आपको किनारे की सीट (आइल सीट) लेनी हो या विंडो सीट लेनी हो तो आपको अतिरिक्त पैसे देने की जरूरत पड़ेगी।’ सिन्हा ने आगे कहा, ‘एयरलाइन के फेयर्स डीरेग्युलेट कर दिए गए हैं और हम लोगों ने कुछ सिद्धांत स्पष्ट किए हैं। वो सिद्धांत हैं- ऑप्ट इन के, ट्रांसपैरंसी के और नॉन-डिस्क्रिमिनेशन के। आपके और एयरलाइन कंपनी के बीच जो समझौता होता है, उसके आधार पर आप सर्विस ले सकते हैं।’ दरअसल, सिन्हा जिस समझौते की बात कर रहे थे, वह एयरलाइन कंपनी की ओर से तय नियम और शर्तें हैं जिन्हें स्वीकार करके ही टिकट बुक किया जाता है।

अतिरिक्त शुल्क का मसला गंभीरः नायडू
जयंत सिन्हा के इस जवाब पर खुद सभापति वेंकैया नायडू ने कहा कि सांसद ने 29 जून का विशेष उदाहरण दिया है, क्या यह भेदभावपूर्ण नहीं है? इसके बारे में बताएं। इस पर मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि अगर इस मामले में कुछ हुआ हो तो कार्रवाई जरूर होगी।

अतिरिक्त शुल्क से कितनी कमाई, बताए सरकार
सांसद छाया वर्मा ने पूरक प्रश्न में पूछा कि एयरलाइंस कंपनियों ने अतिरिक्त रकम से कितना धन कमाया है। इसक रकम पर जीएसटी नहीं लगता है। क्या इसकी जांच मंत्रालय कराएगा? इस पर मंत्री ने कहा कि यात्री के साथ हुए कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक एयर लाइन कंपनी सीटों की कीमत तय कर सकती है। सरकार तभी ऐक्शन लेती है जब ऑप्ट-इन, ट्रांसपैरंसी और नॉन-डिस्क्रिमिनेशन के सिद्धातों का उल्लंघन होता है।

लगेज चार्ज में मनमानी वृद्धि पर सवाल
फिर जेडीयू सांसद हरिवंश ने कहा कि एयरलाइन कंपनियों ने हाल में लगेज पर 300 रुपये की जगह 500 रुपये वसूलना शुरू कर दिया है। इस पर राज्य मंत्री सिन्हा ने कहा कि बैगेज चार्ज, सीट चार्ज अथवा अन्य सुविधाओं के लिए किए गए चार्ज को लेकर कोई रेग्युलेशन नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में हाई कोर्ट का भी फैसला आया है।

एयर इंडिया में बिक रही हैं पसंदीदा सीटें?
बाद में महाराष्ट्र से एनसीपी के राज्य सभा सांसद माजिद मेमन ने पूछा कि अखबारों में आया है कि एयर इंडिया भी प्रेफर्ड सीट बेचेगी। क्या यह सही है? पैसा ज्यादा लेकर पसंदीदा सीट देने का मामला गड़बड़ी का है। तो क्या एयर इंडिया भी प्रीमिय लेकर सीटें बेचेगी? इस पर जयंत सिन्हा कहा कि हां, ऐसा ही है। मंत्री ने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यही व्यवस्था है। दुनियाभर में यही कमर्शल प्रैक्टिस लागू है। एयर इंडिया को भी सही तरीके से चलाना है तो यहां भी इस प्रैक्टिस का पालन कर रहे हैं। मिडल सीट को सबसे कम भाड़े पर दिया जा रहा है। जो ज्यादा आराम चाहते हैं वो आइल सीट लें, विंडो सीट लें, बिजनस टिकट लें।’

सिन्हा ने दावा किया कि भारत में हवाई किराया दुनिया में सबसे कम है। उन्होंने कहा कि जो लोग सस्ते में हवाई यात्रा करना चाहते हैं, वो तीन महीने पहले मिडल क्लास सीट लें तो वह दुनिया के सबसे सस्ते टिकट पर हवाई यात्रा कर सकेंगे।

प्रीमियम टिकटों की कीमत वृद्धि की सीमा तय करे सरकार
राज्य सभा में एयरलाइंस के प्रीमियम टिकटों को लेकर भी सवाल उठा। तमिलनाडु से डीएमके सांसद तिरुची शिवा ने कहा कि ज्यादा पैसे लेकर प्रेफर्ड सीट स्कीम से यात्रियों के बीच भेदभाव की भावना महसूस होती है। इस स्कीम की जगह पहले आओ, पहले पाओ की नीति ठीक है। हालांकि, बाद में सीटें बुक करानेवाले से अनाप-शनाप पैसे वसूलना भी ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि फ्लाइट डिपार्चर के वक्त किराया 400 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। ऐसे में आपात परिस्थिति में यात्रा करनेवाले लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है। डीएमके सांसाद ने सरकार को किराए में वृद्धि की आखिरी सीमा तय करने की सलाह दी।

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