आम्रपाली ने ऐसे किया बायर्स के पैसों से ‘खेल’

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त फरेंसिक ऑडिटरों ने गुरुवार को आम्रपाली ग्रुप की कंपनियों के वित्तीय गड़बड़झाले की जांच को लेकर अपनी पहली रिपोर्ट पेश की। ऑडिटरों ने रिपोर्ट में विस्तार से बताया है कि किस तरह होमबायर्स के पैसों को निर्माण और हाउजिंग प्रॉजेक्ट्स के बजाय दूसरे उद्देश्यों के लिए खर्च किया गया। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि होमबायर्स के पैसों का एक बड़ा हिस्सा प्रफेशनल चार्जेज के नाम पर डायरेक्टरों की जेब में गया। इस तरह डायरेक्टरों को करोड़ों रुपये दिए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने ऑडिटर रवि भाटिया और पवन कुमार अग्रवाल को यह जिम्मेदारी दी है कि वे पता लगाएं कि होमबायर्स के 2,765 करोड़ रुपये से ज्यादा पैसों को किस तरह दूसरे उद्देश्यों के लिए खर्च किया गया। ऑडिटरों को आम्रपाली ग्रुप की सभी 46 कंपनियों की फरेंसिक ऑडिट के लिए कहा गया है। ऑडिटरों की रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि होमबायर्स ने जो पैसे दिए, उनसे प्रॉजेक्ट्स आसानी से और समय पर तैयार हो सकते थे लेकिन कंपनी ने उन पैसों को दूसरे उद्देश्यों के लिए डायवर्ट कर दिया, जिस वजह से हाउजिंग प्रॉजेक्ट्स वित्तीय संकट से जूझने लगें और निर्माण में देरी हुई।

ऑडिटरों ने इस रिपोर्ट को ग्रुप की 46 में से 2 कंपनियों- आम्रपाली सैफायर डिवेलपर्स लिमिटेड और आम्रपाली जोडिएक डिवेलपर प्राइवेट लिमिटेड के लेनदेन विवरणों की जांच के बाद तैयार किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि आम्रपाली सैफायर ने ग्रुप कंपनियों में 129 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। ये पैसे किस उद्देश्य से दिए गए, इसकी जांच अभी होनी है। रिपोर्ट के मुताबिक होमबायर्स के 100 करोड़ रुपयों को आम्रपाली इन्फ्रास्ट्रक्चर के शेयरों में निवेश किया गया और 36 करोड़ रुपये दूसरी कंपनियों को दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) अनिल शर्मा और डायरेक्टर शिव प्रिया को कंपनी की तरफ से प्रफेशनल चार्जेज के रूप में 2.41 करोड़ रुपये दिए गए।

इसी तरह रिपोर्ट में बताया गया है कि आम्रपाली जोडिएक के होमबायर्स के करीब 242 करोड़ रुपये को दूसरी कंपनियों को ट्रांसफर किया गया। इस बीच, वकील एम. एल. लाहोटी ने एक याचिका दाखिल की है, जिसमें आम्रपाली ग्रुप पर आरोप लगाया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी सभी 46 कंपनियों के सभी डायरेक्टरों के नामों का खुलासा नहीं कर रहा है। होमबायर्स की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए लाहोटी ने कहा कि आम्रपाली ग्रुप की कंपनियों में कम से कम 102 डायरेक्टर/एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर हैं, न कि 92, जैसा कि ग्रुप दावा कर रहा है।

होमबायर्स ने अपनी याचिका में कहा है कि लाहोटी को पता चला है कि कंपनी में कम से कम 102 डायरेक्टर/एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर हैं और ऐसा लगता है कि 16 नामों को ग्रुप जानबूझकर छिपा रहा है। याचिका में कहा गया है कि इन 16 डायरेक्टरों में आम्रपाली सीएमडी अनिल शर्मा की दो बेटियों स्वप्निल शिखा और दीपशिखा, उनकी पत्नी पल्लवी मिश्रा समेत प्रमोटरों और डायरेक्टरों के करीबी रिश्तेदार भी शामिल हैं।

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