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इंतजार खत्म, देश की सबसे आधुनिक ट्रेन, अगले महीने से ट्रायल

मुंबई

इस साल बजट में ‘ट्रेन 18’ के नाम से जिस आधुनिकतम ट्रेन की घोषणा की गई थी, वह बनकर लगभग तैयार है। भारतीय रेलवे ट्रैक पर दौड़ने वाली आम ट्रेनों से एकदम अलग ‘ट्रेन 18’ बिना इंजन की होगी। सब अर्बन ट्रेनों की तरह इस ट्रेन के दोनों छोर पर मोटर कोच होंगे, यानी ये दोनों दिशाओं में चल सकेगी। भविष्य में शताब्दी जैसी ट्रेनों को हटाकर ट्रेन 18 चलाने की योजना है। सूत्रों के अनुसार इसे अगले महीने मुंबई-अहमदाबाद रूट पर इसका ट्रायल शुरू हो सकता है।

अगले महीने से शुरू होगा ट्रायल
ट्रेन 18 को इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) चेन्नई में तैयार किया जा रहा है। इस प्रॉजेक्ट के लिए रेल मंत्रालय द्वारा अब तक 120 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं। आईसीएफ के मुख्य यांत्रिक अभियंता (सीएमई) शुभ्रांशु के अनुसार, ‘ट्रेन 18 लगभग बनकर तैयार है। इसे सितंबर में डिलिवर कर दिया जाएगा। इसके बार आरडीएसओ द्वारा ट्रायल किए जाएंगे।’ शुभ्रांशु के अनुसार ट्रायल गतिमान एक्सप्रेस ट्रेन वाले रूट पर किए जा सकते हैं। इस ट्रेन की अधिकतम स्पीड 170 किमी प्रतिघंटा के करीब रहने वाली है।

‘मेक इन इंडिया’ की परियोजना
ट्रेन 18 को मेक इन इंडिया के तहत तैयार किया जा रहा है। यह ट्रेन पूरी तरह से वातानुकूलित होगी, सभी कोच एक दूसरे से कनेक्टेड होंगे। स्टेनलेस स्टील की बॉडी वाली इस ट्रेन के डिजाइन आईसीएफ ने तैयार किए हैं। इस ट्रेन में वाई-फाई, एलईडी लाइट, पैसेंजर इनफर्मेशन सिस्टम और पूरे कोच में दोनों दिशाओं में एक ही बड़ी सी खिड़की होगी। अधिकारी ने बताया कि इस ट्रेन में सिर्फ बैठने की सुविधा होगी। रेल मंत्रलाय ने 16 कोच के दो रैक्स का ऑर्डर आईसीएफ को दिया है। हर एक कोच लगभग 5 करोड़ रुपये में बनकर तैयार होगा। ट्रेन-18 के ट्रेन-20 तैयार किया जाएगा।

मुंबई से ट्रेन-18 का कनेक्शन
आईसीएफ से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि दूसरे सेट के लिए काम शुरू हो चुका है। अधिकारी की मानें, तो दूसरा ट्रेन सेट मुंबई को मिलने वाला है और अहमदाबाद-मुंबई के बीच चलाया जाएगा। गौरतलब है कि अगले साल 8 राज्यों में चुनाव होने हैं। पहले ट्रेन सेट को उन्हीं में से किसी एक राज्य में हरी झंडी दिखाई जा सकती है। एक अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर यात्रा के दौरान इलेक्ट्रिकल से लोकोमोटिव बदलने में काफी वक्त जाया हो जाता है। ट्रेन सेट को दोनों दिशा में चलाया जा सकता है और लोकोमोटिव बदलने का झंझट भी नहीं, जिससे वक्त की बचत होगी।

ऊर्जा बचाने के लिए ग्रीन फील्ड टर्मिनस
पश्चिम रेलवे के एक बड़े अधिकारी के अनुसार कि बोइसर के आस-पास ग्रीन फील्ड टर्मिनस बनाने पर विचार हो रहा है। ग्रीन फील्ड टर्मिनस का मतलब है कम ऊर्जा की खपत कर ट्रेनों का रखरखाव करना। इस तरह के टर्मिनस में ट्रेन सेट जैसे रेक का रखरखाव होगा। ट्रेन सेट की खासियत ही यही है कि कम ऊर्जा का दोहन, गति और सुरक्षित। सामान्य मेल एक्सप्रेस ट्रेनों में WAP-5 और WAG-7 में 5500 अश्व शक्ति के वाले इंजन होते हैं, इनकी ऊर्जा खपत ट्रेन सेट या ईएमयू के मुकाबले ज्यादा होती है।

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