ईरानी तेल: … तो इसलिए झुका अमेरिका, इन देशों की आई मौज

अमेरिका ने कई मध्य पूर्वी मतभेदों में भागीदारी की वजह से तेहरान को दंडित करने के लिए ईरान के तेल निर्यात पर एक बार फिर प्रतिबंध लगा दिया है। लेकिन तेल की कीमतों में वृद्धि को देखते हुए उसने ईरान के सबसे बड़े खरीदारों (चीन, भारत, दक्षिण कोरिया, जापान, इटली, ग्रीस, ताइवान और तुर्की) को इन प्रतिबंधों में कुछ छूट दी है। ये 8 देश ईरान के तेल निर्यात का कुल 75 फीसदी खपत करते हैं। हालांकि अमेरिका और छूट प्राप्त देशों ने यह खुलासा नहीं किया कि उन्हें कितना तेल आयात करने की अनुमति है?

चीन दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है, साथ ही साथ वह ईरान के सबसे बड़े तेल खरीदारों में से भी एक है। हालांकि चीन के कुछ सूत्रों के मुताबिक, अगले 6 महीनों तक चीन 3,60,000 बैरल प्रतिदिन के हिसाब से क्रूड ऑइल खरीदने की अनुमति मिली है। हालांकि प्रतिबंध से पहले यह छूट 6,58,000 बैरल प्रतिदिन थी।

तेल आयातकों के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। वहीं, ईरान के सबसे बड़े तेल खरीदारों में भारत का चीन के बाद दूसरा स्थान है। प्रतिबंधों में कुछ छूट के बाद भारत को 3 लाख बैरल क्रूड ऑइल प्रतिदिन खरीदने की अनुमति है। इससे पहले यह सीमा 5,60,000 बैरल प्रतिदिन की थी।

ईरान से तेल खरीदने वाले बड़े देशों में दक्षिण कोरिया भी शामिल है। दक्षिण कोरिया में क्रूड ऑइल का सबसे ज्यादा खपत वहां की पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री करती है। इस छूट के बाद दक्षिण कोरिया को 1,30, 000 बैरल प्रतिदिन क्रूड ऑइल खरीदने की अनुमति मिली है। इससे पहले यह सीमा 2 लाख बैरल प्रतिदिन थी जबकि 2017 में यह 3,50,000 बैरल प्रतिदिन थी।

जापान भी उन बड़े एशियाई देशों में है जो ईरान से तेल की खरीदारी करते हैं। हालांकि अगले 6 महीनों तक जापान ईरान से तेल की कितनी खरीदारी करेगा इसका खुलासा अभी तक नहीं हुआ है। ताइवान ईरान से नियमित तौर पर तेल का आयात नहीं करता है लेकिन फिर भी अमेरिकी प्रतिबंधों से मिली छूट में ताईवान भी शामिल है। ताइवान कच्चे तेल का कितनी मात्रा में आयात करेगा इसको लेकर कोई सटीक जानकारी सामने नहीं आई है।

बीते 2 सालों से तुर्की और इटली ईरान से 2 लाख बैरल प्रतिदिन के हिसाब से कच्चे तेल का आयात करते थे जबकि ग्रीस 1 लाख बैरल से भी कम का आयात करता था। हाल के सप्ताहों में इटली और ग्रीस ने पूरी तरह से खरीदारी को बंद कर दिया था। ऐसे में इन देशों को मिली छूट ने बाजार को आश्चर्यचकित कर दिया। वहीं, तुर्की का कहना है कि वह छूट प्राप्त करने के बाद भी संभावित आयात का मूल्यांकन कर रहा है।

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