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कृषि जनगणना के आंकड़े जारी, महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

नई दिल्ली

सरकार ने सोमवार को वर्ष 2015-16 की कृषि जनगणना रिपोर्ट जारी की जिसमें खेती के रकबे में वर्ष 2010-11 की तुलना में 1.53 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस गणना के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, देश में खेती का रकबा 15 करोड़ 71.4 लाख हेक्टेयर है। इस दौरान कृषि में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, 2015-16 में कृषि जोत का औसत आकार घटकर 1.08 हेक्टेयर रह गया। 2010-11 में यह 1.15 हेक्टेयर था।

गणना रिपोर्ट के अनुसार, 2010-11 में कृषि जोत रखने वालों में महिलाओं का हिस्सा 12.79 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2015-16 में 13.87 प्रतिशत हो गया। इसी तरह खेती के रकबे के हिसाब से महिलाओं का हिस्सा 10.36 प्रतिशत से बढ़कर 11.57 प्रतिशत हो गया। एक सरकारी बयान में कहा गया है, ‘इससे पता चलता है कि कृषि भूमि के प्रबंध और परिचालन में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है।’

कृषि मंत्रालय ने कहा है कृषि-जनगणना केलिए आधार वर्ष 1970-71 रखा गया है। यह गणना, खेती की भू-धारिता के संरचनात्मक पहलुओं के आंकड़े जुटाने के लिए हर पांच साल पर की जाती है। यह इसकी 10वीं कड़ी है। बयान में कहा गया है, ‘वर्ष 2010-11 में देश में खेती जोत की कुल संख्या 13.8 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2015-16 में 14.6 करोड़ हो गई है। यह इसमें 5.33 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।’ इसके विपरीत खेती-बाड़ी का कुल रकबा 2010-11 के 15 करोड़ 95.9 लाख हेक्टेयर से घटकर 2015-16 में 15 करोड़ 71.4 लाख हेक्टेयर रह गया।

ताजा कृषि गणना कुल जोत में लघु एवं सीमांत जोत (दो हेक्टेयर से कम की जोत) का अनुपात 86.21 प्रतिशत है। 2010-11 में ऐसी जोता का हिस्सा 84.97 प्रतिशत था। कुल कृषि क्षेत्र में छोटे और सीमांत किसानों के पास की जमीन का हिस्सा इस समय 47.34 प्रतिशत है। 2010 – 11 में यह हिस्सा 44.31 प्रतिशत था। वर्ष 2015-16 में अर्ध-मध्य और मध्य आकार वाली जोतों (दो से 10 हेक्टेयर) का हिस्सा संख्या के हिसाब से 13.22 प्रतिशत और क्षेत्र फल के हिसाब से 43.61 प्रतिशत हिस्सा था। वर्ष 2015-16 में बड़ी जोत (10 हेक्टेयर या ऊपर) वाले किसान 0.57 प्रतिशत थे और उनके पास का रकबा कुल कृषि रकबे का 9.04 प्रतिशत था। 2010-11 में उनकी संख्या 0.71 प्रतिशत और उनका रबका कुल रकबे का 10.59 प्रतिशत था।

देश भर में कुल 14.6 करोड़ जोत में उत्तर प्रदेश दो करोड़ 38.2 लाख भू.धारकों की संख्या के साथ पहले स्थान पर था। इसके बाद बिहार (एक करोड़ 64.1 लाख), महाराष्ट्र (एक करोड़ 47.1 लाख), मध्य प्रदेश (एक करोड़), कर्नाटक में (86.8 लाख), आंध्र प्रदेश (85.2 लाख), तमिलनाडु (79.4 लाख), राजस्थान (76.5 लाख) और पश्चिम बंगाल (72.4 लाख) का नंबर आता है।

कुल कृषि क्षेत्र में राजस्थान का हिस्सा दो करोड़ 8.7 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र का एक करोड़ 98 लाख हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश एक करोड़ 74.5 लाख हेक्टेयर, मध्य प्रदेश एक करोड़ 56.7 लाख हेक्टेयर और कर्नाटक का हिस्सा एक करोड़ 17.2 लाख हेक्टेयर था। जोतों की संख्या में सर्वाधिक वृद्धि मध्य प्रदेश में सर्वाधिक 12.74 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। इसके बाद आंध्र प्रदेश 11.85 प्रतिशत, राजस्थान 11.12 प्रतिशत, केरल 11.02 प्रतिशत, मेघालय 10.9 प्रतिशत, कर्नाटक 10.78 प्रतिशत और नागालैंड में 10.5 प्रतिशत दर्ज की गई है। हालांकि, गोवा में जोत की संख्या में सबसे अधिक (28.17 प्रतिशत) गिरावट दर्ज की गयी। मणिपुर में गिरावट न्यूनतम (0.0 9 प्रतिशत) रही।

गणना के अनुसार कुल जोतों की संख्या का 91.03 प्रतिशत और कुल क्षेत्र का 88.08 प्रतिशत 14 राज्य- आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के खाते में आता है। व्यक्तिगत, संयुक्त और संस्थागत जोतों की संख्या में पिछली गणना के बाद से क्रमश: 5.04 प्रतिशत, 7.07 प्रतिशत और 10.88 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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