बदल गया है किलोग्राम मापने का तरीका, जानें- आप पर कितना फर्क

वॉशिंगटन

किलोग्राम मापने का तरीका बदल गया है। अभी तक इसे प्लैटिनम-इरिडियम के अलॉय से बने जिस सिलिंडर से मापा जाता था, उसे रिटायर कर दिया गया है। साल 1889 से इसी को माप माना जाता था। हालांकि अब वैज्ञानिक माप के जरिए किलोग्राम तय होगा। इस बारे में पैरिस में हुई दुनिया भर के वैज्ञानिकों की मीटिंग में एकमत से फैसला किया गया है। हालांकि माप का तरीका बदलने से मार्केट में होने वाले माप में फर्क नहीं पड़ेगा।

20 मई से नई परिभाषा लागू हो जाएगी। किलोग्राम को एक बेहद छोटे मगर अचल भार के जरिए परिभाषित किया जाएगा। इसके लिए “प्लैंक कॉन्स्टेंट” का इस्तेमाल किया जाएगा। नई परिभाषा के लिए वजन मापने का काम किब्बल नाम का एक तराजू करेगा। अब इसका आधार प्लेटिनम इरीडियम का सिलिंडर नहीं होगा। इसकी जगह यह प्लैंक कॉन्स्टेंट के आधार पर तय किया जाएगा। क्वांटम फिजिक्स में प्लैंक कॉन्स्टेंट को ऊर्जा और फोटॉन जैसे कणों की आवृत्ति के बीच संबंध से तैयार किया जाता है।

जानें, क्या था पुराना सिस्टम
किलोग्राम को मापने के पुराने सिस्टम में किलो का वजन गोल्फ की गेंद के आकार की प्लेटिनिम इरिडियम की गेंद के सटीक वजन के समान होता है। यह गेंद कांच के जार में पेरिस के पास वर्साय की ऑर्नेट बिल्डिंग की सेफ में रखी हुई है।

इस सेफ तक पहुंचने के लिए उन तीन लोगों की जरूरत होती है, जिनके पास तीन अलग अलग चाभियां हैं। ये तीनों लोग तीन अलग-अलग देशों में रहते हैं। इन चाभियों की मदद से ही इस सेफ को खोला जा सकता है। इसकी निगरानी इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेजर्स करती है।

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