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रुपया संभालने को 2013 में लौटेगी सरकार?

नई दिल्ली

रुपये में गिरावट, कच्चे तेल के बढ़ते दाम और बढ़ते चालू घाटे के बीच अब सरकार ने कदम उठाने की बात कही है। इससे पहले सरकार का कहना था कि ऐसा होना कोई बड़ी बात नहीं है। जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी सप्ताह के आखिरी में आर्थिक हालात की समीक्षा के लिए बैठक करने जा रहे हैं। बुधवार को पिछले 18 महीने में रुपया सबसे ज्यादा मजबूत हुआ। इसमें 1.1 फीसदी की मजबूती दर्ज की गई। बुधवार शाम सेंसेक्स भी 0.9 प्रतिशत यानी 305 अंकों की बढ़ोतरी के साथ बंद हुआ।

जानकारों का कहना है कि रुपये का समर्थन न करने और ओवरवैलुएशन का तर्क देने से रुपया और नीचे गिर सकता है। अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक व्यापार घाटा कम नहीं होने वाला है साथ ही यूएस फेडरल रिजर्व इस महीने ब्याज दर भी बढ़ा सकता है जिससे रुपये पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी तरफ तुर्की की मुद्रा में 3 फीसदी का सुधार रुपये के लिए अच्छा संकेत है।

2013 में वापसी?
अक्टूबर में होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में रिजर्व बैंक ब्याज दर बढ़ा सकता है। साथ ही 2013 की तरह रुपये को मजबूत करने के लिए अमीर NRIs से डॉलर डिपॉजिट करवाया जा सकता है। कुछ वस्तुओं के आयात पर शुल्क बढ़ाने की भी संभावना है। साल 2013 में भारत ने सोने की जूलरी के आयात पर शुल्क बढ़ा दिया था। इस समय तेल के बाद इलेक्ट्रॉनिक आइटम सबसे ज्यादा आयात होते हैं।

इसके अलावा करंसी एक्सचेंज के लिए आरबीआई तेल कंपनियों की खातिर स्पेशल विंडो भी खोल सकती है। बता दें कि केंद्रीय मंत्री नितन गडकरी ने कहा था कि डीजल में एथनॉल मिलाने से इसकी कीमत 50 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। पेट्रोल में एथनॉल मिलाने के लिए सरकार ने इसकी कीमत में 25 फीसदी का इजाफा करने को मंजूरी दे दी है।

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