रेलवे टिकट के लिए ज्यादा पैसे ले रहा है IRCTC? जांच के आदेश

इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी आईआरसीटीसी पर लाखों लोग ऑनलाइन टिकट बुक करते हैं. आईआरसीटीसी पर आरोप लगा है कि इसने ई-टिकट के लिए सही बेस फेयर के मुकाबले ज्यादा पैसे वसूले हैं. इस आरोप को लेकर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने भारतीय रेलवे और आईआरसीटीसी के ख‍िलाफ जांच के आदेश दिए हैं. सीसीआई ने यह आदेश गुजरात के मीत शाह और आनंद रणपारा की श‍िकायत के बाद दिया है.

इन दोनों ने अपनी श‍िकायत में आरोप लगाया है कि ये दोनों एंट‍िटी बेस फेयर कैल्कुलेट करने के लिए जो फॉर्मूला अपनाते हैं, उसके जरिये ज्यादा किराया वसूला जा रहा है. उन्होंने इसे समझाते हुए बताया कि बेस फेयर को कैल्कुलेट करते वक्त 5 रुपये के मल्टीपल के करीब कुल बेस फेयर वसूला जाता है. आरोप है कि यह तरीका भारत में रेल टिकट बेचने का गलत तरीका है.

शुरुआती जांच में प्रतिस्पर्धा आयोग ने भारतीय रेलवे और आईआरसीटीसी को नियमों का उल्लंघन करने का जिम्मेदार पाया है. इसके बाद 9 नवंबर को सीसीआई ने अपनी जांच शाखा डायरेक्टर जनरल को जांच के आदेश दे दिए हैं. इस जांच के दौरान इसमें किसी व्यक्ति के शामिल होने की भूमिका की जांच भी की जाएगी.

शिकायत में यह भी कहा गया है कि फिलहाल ग्राहक ट्रेन टिकट के लिए रेलवे मंत्रालय और आईआरसीटीसी पर ही निर्भर है. ऐसे में ग्राहकों के पास इस सेवा को लेने की खातिर कोई और विकल्प ही नहीं है. श‍िकायत में यह भी आरोप लगाया है कि बेस फेयर कैल्कुलेट करने के इस तरीके से रेलवे ने 18 करोड़ रुपये बनाए. ये पैसे ग्राहकों की जेब से ल‍िए गए हैं. (सभी फोटो: Reuters)

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