Tuesday , October 27 2020

RBI की असमंजसःगिरते रुपये को संभालें कि कैश क्रंच पर ध्यान दें

नई दिल्ली

किस तरह की मौद्रिक नीति पर आगे बढ़ा जाए, देश का केंद्रीय बैंक आरबीआई इसे लेकर असमंजस का सामना कर रहा है। उसके सामने उहापोह की स्थिति यह है कि आखिर वह गिरते रुपये को थामे कि बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नगदी की व्यवस्था सुनिश्चित करे ताकि आर्थिक गतिविधियों में कोई अड़ंगा नहीं आ सके।

आरबीआई के सामने एक की जोखिम पर दूसरे को सहारा देने की नौबत आई हुई है। उसे यह अच्छी तरह पता है कि दोनों में से का दामन थामने से दूसरा अर्थव्यस्था को नुकसान पहुंचाएगा। अगर वह एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करनेवाली करंसी रुपये को थामता है तो अर्थव्यवस्था से बड़े पैमाने पर कैश वापस लेने से जोखिम पैदा होगा जो विभिन्न कारणों से पहले से ही झटके झेल रही है।

ऐसे में विकल्प यह है कि रुपये को डॉलर के मुकाबले रेकॉर्ड निचले स्तर 70 के पार जाने दिया जाए। ऐसे में अगले साल आम चुनाव की ओर मुखातिब हो रही अर्थव्यवस्था से निवेशकों की भरोसा हिलेगा और निवेश में कमी आएगी। अर्थशास्त्रियों को इसकी कम उम्मीद है कि आरबीआई रुपये की स्थिरता को लेकर बहुत चिंता करेगा, भले ही उसने ताजा मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत ब्याज दरें बढ़ाकर महंगाई को नियंत्रण में रखने को प्राथमिकता दी हो।

आईसीआईसीआई सिक्यॉरिटीज प्राइमरी डीलरशिप के चीफ इकॉनमिस्ट ए प्रसन्ना कहते हैं, ‘अर्थव्यवस्था में पर्याप्त नकदी बनाए रखते हुए रुपये की गिरावट थामने के बीच संतुलन साधना आरबीआई के लिए बहुत टेढ़ी खीर है।’ उन्होंने कहा, ‘आरबीआई ने फिर से नीतिगत ब्याज दरें बढ़ा दीं, इससे यह साबित होता है कि वे महंगाई को काबू में रखने को लेकर गंभीर हैं और आर्थिक वृद्धि को लेकर उन्हें बहुत चिंता नहीं है। इसलिए, वे अर्थव्यवस्था में नकदी संकट को बढ़ने दे सकते हैं ताकि उनकी महंगाई नियंत्रण नीति बरकरार रहे।’

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