Wednesday , October 21 2020

जैक मां के ‘दो शब्द’ से इंडियन स्टार्टअप्स की बढ़ीं मुश्किलें

नई दिल्ली

अलीबाबा, जैक मा और ऐंट ग्रुप का नाम तो जानते ही होंगे। पिछले दिनों ऐंट ग्रुप ने IPO प्रॉस्पेक्टस में दो शब्दों का जिक्र किया, जिसके बाद इंडियन स्टार्टअप्स के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐंट ग्रुप ने अपने इस प्रॉस्पेक्टस में “Significant influence” का जिक्र किया। पेटीएम में इस ग्रुप ने बहुत बड़े पैमाने पर निवेश किया है। गलवान घाटी की घटना के बाद से पेटीएम का जबरदस्त विरोध किया जा रहा है।

30 फीसदी हिस्सेदारी
ऐंट ग्रुप ने One97 Communications में साल 2015 में करीब 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया था। यह Paytm की पैरंट कंपनी है। उस समय कंपनी में उसे करीब 45 फीसदी की हिस्सेदारी मिली। अब उसकी हिस्सेदारी घटकर 30 फीसदी पर पहुंच चुकी है। भारतीय स्टार्टअप्स में चाइनीज निवेश कोई नई घटना नहीं है। लेकिन गलवान घाटी घटना के बाद चीन के हर चीज का बहिष्कार कर रहे हैं।

कई भारतीय कंपनियों में चाइनीज निवेश
इस बात को समझने की जरूरत है कि चीन भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। उसने भारत की दर्जनों प्राइवेट कंपनियों और स्टार्टअप्स में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। चाहे HDFC बैंक हो, ICICI बैंक हो, Paytm हो या फिर MakeMyTrip, चाइनीज कंपनियों ने यहां बहुत बड़े पैमाने पर निवेश किया है।

सिग्निफिकेंट इंफ्लूएंस एक अकाउंटिंग टर्म
चाइनीज निवेश को लेकर विवादों में घिरे पेटीएम के प्रेसिडेंट मधुर देवरा ने कहा कि “Significant influence” एक अकाउंटिंग टर्म है। अगर किसी भी निवेशक की हिस्सेदारी 20 फीसदी से बढ़ जाती है तो वह इस टर्म का इस्तेमाल करता है। इसका मतलब यह नहीं होता है कि कंपनी का ओरिजिन बदल जाता है। इसके अलावा कंपनी के कामकाज और डिसीजन पर भी उसका कोई असर नहीं होता है। उन्होंने साफ-साफ कहा कि जैसे मारुति और एचडीएफसी इंडियन कंपनी है, पेटीएम भी उतनी ही इंडियन कंपनी है।

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