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विनिवेश में सुस्ती, इस साल लक्ष्य से डेढ़ गुना ज्यादा उधार लेगी केंद्र सरकार!

नई दिल्ली ,

सरकार ने पहली बार यह स्वीकार कर लिया है कि वह सार्वजनिक कंपनियों के विनिवेश लक्ष्य को इस साल हासिल नहीं कर पाएगी. इसकी वजह से सरकार को इस साल अपने लक्ष्य से डेढ़ गुना ज्यादा करीब 12 लाख करोड़ रुपये का उधार लेना पड़ सकता है. गौरतलब है कि कोरोना संकट की वजह से विनिवेश की चाल और धीमी पड़ गई है. भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड की प्रारंभिक बिड के लिए अंतिम तिथि पांचवीं बार बढ़ा दी गई है.

उधारी का लक्ष्य बढ़ाया
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने इस साल उधारी का लक्ष्य बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये कर दिया है. बजट में सरकार ने इस वित्त वर्ष में 7.8 लाख करोड़ रुपये उधार लेने का लक्ष्य रखा था.

कैसे लेती है सरकार उधार
सरकार बॉन्ड जारी कर जनता या संस्थाओं से उधार लेती है. इस साल सरकार अब तक बॉन्ड जारी कर 7.7 लाख करोड़ रुपये का उधार ले चुकी है जो बजट लक्ष्य के लगभग बराबर हो गया है. कोरोना संकट की वजह से इस साल सरकार को खर्च ज्यादा करना पड़ रहा है और राजस्व कम हो गया है. इसकी वजह से सरकार को ज्यादा उधार लेना पड़ रहा है.

विनिवेश से भी उम्मीद नहीं
सरकार इस साल विनिवेश से भी कुछ खास हासिल नहीं कर पाई है. एअर इंडिया और बीपीसीएल के विनिवेश की प्रक्रिया लगातार टल रही है. सरकार ने इस वित्त वर्ष में विनिवेश से 2.1 लाख करोड़ रुपये जुटाने का का बड़ा लक्ष्य रखा था, लेकिन अब इसके पूरे होने की उम्मीद बिल्कुल नहीं है.अभी तक सरकार को ​विनिवेश से करीब 20 हजार करोड़ रुपये ही मिले हैं. एलआईसी के आईपीओ से सरकार को बड़ी रकम मिलने की उम्मीद है, लेकिन यह भी लगता है ​कि अब इस वित्त वर्ष में नहीं आ पाएगा.

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