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JEE-मेन: 2019 से होंगे 2 बड़े बदलाव, जानें क्या

नई दिल्ली

अगले साल से इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी समेत इंजिनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए आयोजित होने वाले जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन में दो बड़े बदलाव होंगे। एक बदलाव तो रैंकिंग से संबंधित है और दूसरा परीक्षा के माध्यम और फॉर्मेट से। पहले रैंकिंग के लिए छात्रों द्वारा परीक्षा में प्राप्त अंकों को आधार बनाया जाता था लेकिन अब पर्सेंटाइल स्कोर को आधार बनाया जाएगा। दूसरी तरफ परीक्षा की बात करें तो परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी और नैशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) साल में दो बार इसका आयोजन करेगी। परीक्षा कई दिनों तक चलेगी और हर दिन में कई सत्र होंगे।

परीक्षा का माध्यम और फॉर्मेट
2019 से जेईई-मेन की परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी और परीक्षा का आयोजन साल में दो बार (जनवरी और अप्रैल) होगा। छात्रों के पास दोनों में से एक या दोनों बार होने वाली परीक्षा में बैठने का विकल्प होगा। दोनों बार में परीक्षा का आयोजन 14 दिनों तक होगा और हर दिन कई सत्र होंगे। इस तरह की व्यवस्था परीक्षा के दौरान धोखाधड़ी और गड़बड़ी को काफी हद तक रोकने के उद्देश्य से की गई है।

परीक्षा के फार्मेट के बारे में बताते हुए एनटीए के एक अधिकारी ने बताया, ‘हर सेशन में छात्रों को सवालों के अलग सेट्स मिलेंगे। उन्होंने बताया कि यह कोशिश रहेगी कि सभी सत्रों के क्वेस्चन पेपर में बराबर कठिनाई स्तर वाले सवाल पूछे जाएं लेकिन किसी सत्र का क्वेस्चन पेपर ज्यादा कठिन तो किसी सेशन का पेपर थोड़ा आसान हो सकता है। प्रश्नपत्रों में कठिनाई के स्तर से निपटने के लिए यह व्यवस्था की गई है कि प्रत्येक सेशन का पर्सेंटाइल स्कोर उस खास सेशन में छात्रों के प्रदर्शन के अनुसार होगा।’ अधिकारी ने बताया कि कठिनाई के अलग-अलग स्तर की स्थिति में कुछ कैंडिडेट्स को ज्यादा मुश्किल सवालों वाले सेट्स मिल सकते हैं जिससे उनको कम मार्क्स हासिल करने की संभावना रहेगी। ऐसे में पर्सेंटाइल स्कोर के आधार पर नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि परीक्षा के कठिनाई स्तर की वजह से किसी छात्र के साथ अन्याय न हो।

एचआरडी मिनिस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, दिल्ली में अंडरग्रैजुएट-एमबीबीएस टेस्ट के लिए पर्सेंटाइल स्कोर के आधार पर जिस तरह की नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है, उसी प्रक्रिया का एनटीए स्कोर तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

रैंकिंग सिस्टम
जेईई मेन में छात्रों की रैंकिंग के लिए एनटीए स्कोर का सहारा लिया जाएगा। एनटीए स्कोर सभी चरणों में आयोजित परीक्षा के पर्सेंटाइल स्कोर को जोड़कर निकाला जाएगा। पहले सभी सेशन का अलग-अलग पर्सेंटाइल स्कोर निकाला जाएगा। फिर उन पर्सेंटाइल स्कोर को एक साथ मिलाकर ओवरऑल मेरिट और रैंकिंग तैयार की जाएंगी। अगर दो या उससे ज्यादा कैंडिडेट्स का बराबर पर्सेंटाइल हुआ तो जिस कैंडिडेट का मैथ, फीजिक्स, केमिस्ट्री में ज्यादा पर्सेंटाइल होगा, उसका पर्सेंटाइल ज्यादा माना जाएगा।

उम्र भी तय करेगी रैंकिंग
अगर मैथ्स, फीजिक्स, केमिस्ट्री के पर्सेंटाइल के बाद भी ओवरऑल पर्सेंटाइल बराबर रहा तो जिस कैंडिडेट की उम्र ज्यादा होगी, उसका पर्सेंटाइल ज्यादा माना जाएगा। फिर भी पर्सेंटाइल टाई रहा तो जॉइंट रैंकिंग दी जाएगी।

एचआरडी मिनिस्ट्री के अधिकारी ने बताया कि आईआईटीज (रूड़की, कानपुर, दिल्ली, गुवाहाटी), आईआईएम-लखनऊ, एनआईटीज, यूजीसी, आईएएसआरआई (पूसा) और एम्स, दिल्ली के एक्सपर्ट्स का एक कोर ग्रुप बनाया जाएगा। उनको एनटीए स्कोर की गणना की पूरी प्रक्रिया एवं व्यवस्था को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

पर्सेंटाइल क्या और कैसा निकाला जाता है?
परसेंटेज और पर्सेंटाइल दो अलग-अलग चीजें हैं।
परसेंटेज का मतलब होता है कि 100 में से आपको कितना नंबर मिला।
पर्सेंटाइल का मतलब होता है कि आपको कितने छात्रों से ज्यादा नंबर मिला। जैसे अगर आपका पर्सेंटाइल 60 फीसदी है तो इसका मतलब हुआ कि आपने 60 फीसदी उम्मीदवारों से ज्यादा मार्क्स हासिल किए हैं।

यूं निकाला जाता है पर्सेंटाइल
100xकिसी ग्रुप में सर्वाधिक अंक लाने वाले कैंडिडेट्स से कम अंक लाने वाले छात्रों की कुल संख्या/ग्रुप के कुल कैंडिडेट्स की संख्या
जैसे किसी छात्रों को 70 फीसदी मार्क्स मिले और 70 फीसदी से कम मार्क्स लाने वाले छात्रों की कुल संख्या 15000 है जबकि ग्रुप में कुल छात्रों की संख्या 18000 थी तो पर्सेंटाइल यूं निकाला जाएगा।
100×15000/18000=83.33 फीसदी।

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