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यूपी में बिजली निजीकरण से पहले जा सकती है 20,000 संविदाकर्मियों की नौकरी- संघर्ष समिति का आरोप

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लखनऊ

पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने पावर कॉरपोरेशन पर निजी कंपनियों की सुविधा के लिए संविदाकर्मियों को हटाने का आरोप लगाया है।

संघर्ष समिति ने कहा कि पूरे प्रदेश में लगभग 20 हजार संविदा कर्मियों पर नौकरी जाने की तलवार लटक रही है। अभी तक बिजली कंपनियां 1200 संविदाकर्मियों को नौकरी से निकाल चुकी हैं। प्रबन्धन छंटनी के नाम पर भय का वातावरण बनाकर निजीकरण थोपना चाहता है। बिजली कर्मी समझते हैं कि अभी संविदा कर्मी हटाए जा रहे हैं, कुछ समय बाद नियमित कर्मचारी भी हटाए जाएंगे। यह सब निजी घरानों की सुविधा के लिए किया जा रहा है।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के लिए संविदा कर्मियों को बड़े पैमाने पर मनमाने ढंग से हटाया जा रहा है जिससे पूरे प्रदेश में बिजली कर्मचारियों में भारी गुस्सा है। इसके विरोध में सोमवार को बिजली कर्मचारियों ने सभी जिलों और परियोजना मुख्यालयों पर विरोध सभा का आयोजन किया। बिजली कर्मियों का विरोध प्रदर्शन पूरे हफ्ते जारी रहेगा।

1200 संविदाकर्मियों में सभी 55 साल के नहीं
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कंपनियों द्वारा जिन 1200 संविदा कर्मियों को हटाया गया है, उनमें से सभी 55 वर्ष की आयु के नहीं है। ऐसा निजी कंपनियों की सुविधा के लिए किया जा रहा है। निजी घरानों की सुविधा के लिए 25 प्रतिशत संविदा कर्मी हटाए जा रहे हैं।

भय का वातावरण बना रहा पावर कॉरपोरेशन
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि निजीकरण के पहले भय का वातावरण बनाया जा रहा है। 2019 के एक आदेश का हवाला देकर 55 वर्ष की आयु पूरी करने वाले संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है जो यह गलत है। बेहद कम वेतन पाने वाले कई संविदा कर्मी ऐसे हैं जो विभाग और उपभोक्ताओं की सेवा करते हुए विकलांग हो चुके हैं, प्रबन्धन उन्हें भीख मांगने के लिए मजबूर कर रहा है।

दूसरे विभागों के कर्मचारियों ने भी दिया समर्थन
दो बिजली कंपनियों के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारियों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन के समर्थन में दूसरे विभागों के कर्मचारी भी उतर आए हैं। ऑल इण्डिया फोरम अगेन्स्ट प्राइवेटाईजेशन की बैठक रेलवे, रक्षा, डाक विभाग, शिक्षा और अन्य केन्द्रीय महासंघों ने बिजली कर्मचारियों को खुला समर्थन दिया।

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