अकेले पड़े पाक ने US से कहा, हमें भारत के चश्मे से न देखिए

इस्लामाबाद

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान अब अमेरिका से वापस अपने संबंधों को सुधारने की जुगत में लग गया है। आतंकवाद पर बात करने से कतराने वाले पड़ोसी मुल्क ने अब अमेरिका को अलग पाठ पढ़ाने की कोशिश की है। पाकिस्तान ने अमेरिका से कहा है कि उसे इस्लामाबाद और वॉशिंगटन के रिश्ते को केवल भारत के साथ संबंधों के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। दरअसल, एक तरफ क्षेत्र में भारत का प्रभाव बढ़ता जा रहा है तो वहीं, नई सरकार बनने के बाद पाकिस्तान को अमेरिका से मिलनेवाली फंडिंग पर ग्रहण लग गया है। ऐसे में पाकिस्तान की छटपटाहट साफ देखी जा सकती है।

एक दिन पहले ही भारत ने रूस के साथ बहुचर्चित S-400 डील की है और अमेरिका के साथ अपने संबंधों को भी बिगड़ने नहीं दिया जबकि ट्रंप प्रशासन रूस के साथ संबंधों पर लगातार धमकियां देता आ रहा है। ऐसे में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अमेरिका जाकर संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश की है। शनिवार को स्वदेश लौटने के बाद मुल्तान सिटी में उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस्लामाबाद के साथ रिश्तों को केवल अफगान मसले या भारत के साथ संबंधों के संदर्भ में नहीं देखना चाहिए।

अमेरिकी अधिकारियों को भरोसे में लेने की कोशिश
कुरैशी ने बताया कि उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों को यह अहसास कराने की कोशिश की है कि सात दशक पुराने हमारे संबंधों को भारत के चश्मे से देखना उचित नहीं होगा। कुरैशी ने कहा कि क्षेत्रीय स्थितियां ऐसी बनती हैं कि बदलाव करने पड़ते हैं लेकिन क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए पाकिस्तान के योगदान को याद रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक ही दौरे में पूरी बात नहीं बन सकती है, आगे विदेश विभाग अपना प्रयास जारी रखेगा।

गंभीर संकट में है पाक
आपको बता दें कि पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान खान के सामने देश को कई गंभीर संकट से उबारने की चुनौती है। देश जल और ऊर्जा संकट से जूझ रहा है और ऐसे में इमरान ने बांधों के लिए चंदे का सहारा लेने का फैसला किया है। सरकारी खर्चे कम किए जा रहे हैं। सरकारी इस्तेमाल के लिए मौजूद कारें और भैसें भी बेची जा रही हैं। यही नहीं, पाकिस्तान भारत से वार्ता शुरू करने के लिए भी अमेरिका की मदद चाहता है। हाल में पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि उनका देश अमेरिका से भारत-पाक के बीच वार्ता शुरू कराने में भूमिका अदा करने का अनुरोध करता है।

आतंकवाद पर दोहरा रवैया अपनाने के कारण अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 30 करोड़ डॉलर की मदद रद्द कर दी है। हालांकि इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री एसएम कुरैशी ने कहा था कि ये जो 30 करोड़ डॉलर है, ये मदद न थी और न है। हकीकत यह है कि यह पैसा कोलिशन सपॉर्ट फंड के तौर पर आता है। हालांकि अब संकट में घिरे पाकिस्तान के सुर बदल गए हैं।

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