Wednesday , October 21 2020

अब सड़कों पर दिख रहा ‘दलितों का गौरव’, बन गया ब्रैंड

नई दिल्ली

एक ओर जहां ‘दलित’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर देश में बहस छिड़ी है, वहीं दूसरी ओर इस समुदाय के लोग ‘दलित’ और ‘चमार’ जैसे शब्दों को एक फैशन लेबल और ब्रैंड के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। ‘Kiss me. I’m Dalit’, ‘It’s a Dalit thing, you wouldn’t understand’ जैसे स्लोगन्स के साथ वाली टी-शर्ट्स को लोग काफी पसंद कर रहे हैं। ‘वाल्मीकि’ की तस्वीर वाले चाय के कप हों या बाइक पर आंबेडकर के स्टीकर, भारत की सड़कों पर दलितों का ‘गौरव’ जमकर दिख रहा है।

गूगल पर ‘दलित टी शर्ट’ सर्च करने पर ‘Dalit Blood Runs Through My Veins’, ‘Untouchable-Property of Dalit’ और ‘Keep Calm And Say Jai Bhim’ जैसे स्लोगन्स के साथ वाली टी-शर्ट्स बड़ी संख्या में दिखाई देती हैं। एक ऐसा समुदाय जो कल तक अपनी पहचान छिपाता था, वह अचानक अपनी पहचान पर गर्व करने लगा है। दलित विचारक चंद्र भान प्रसाद का कहना है, ‘संवैधानिकता के मजबूत होने और पूंजीवाद के बढ़ते प्रभाव के चलते दलितों पर जाति का प्रभाव कम होता जा रहा है। इसी के चलते वे खुद को आजाद महसूस कर रहे हैं और वे जो हैं, उसे सेलिब्रेट कर रहे हैं।’

खुद को सशक्त बनाने को लेकर युवा दलितों का कहना है कि इसके लिए खुद की पहचान को मजबूत करना पड़ता है। आपने दिल्ली की सड़कों पर ‘जाट’, ‘गुर्जर बॉय’ या ‘राजपूत’ लिखी गाड़ियां तो देखी ही होंगी लेकिन अब अगर ‘वाल्मीकि बॉय’ लिखी गाड़ी देख जाए तो हैरान मत होइएगा। खुद को मजबूत बनाने की ऐसी कोशिशें पहले भी हुई हैं लेकिन उतनी ही कोशिशें उन्हें दबाने की भी हुई हैं। अगस्त में वडोदरा में एक 18 वर्षीय दलित युवक द्वारा बाइक मूंछ का स्टीकर लगाने को लेकर दरबार समुदाय के लोगों ने उसे यह कहकर धमकी दी कि यह ‘ऊंची जाति’ का सिंबल है। वहीं इसी साल मार्च में गुजरात के भावनगर में एक घोड़े पर बैठने को लेकर एक दलित की हत्या कर दी गई थी।

मुंबई में आर्टिस्ट सुधीर राजभर ने ‘चमार स्टूडियो’ बनाया है, जहां वह हैंडबैग्स को फैशनेबल बनाते हैं। 6 महीने पहले इस स्टूडियो को कमर्शली लॉन्च करने वाले राजभर कहते हैं, ‘इसे मैंने कई मोचियों (चमड़े का काम करने वाले) के साथ शुरू किया, उसमें अधिकतर दलित थे और अपनी छोटी-छोटी दुकानें चलाते थे। बाद में हमने चमड़े के कुछ और कारीगरों को अपने साथ जोड़ा।’ इन डिजाइनर प्रॉडक्ट्स की कीमत 1500 से 6000 तक होती है।

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