अमृतसर हादसे पर रेलवे, हमारी कोई गलती नहीं

नई दिल्ली

पंजाब के अमृतसर में दशहरे के मौके पर भीषण ट्रेन हादसे पर रेलवे का कहना है कि पुतला दहन देखने के लिए लोगों का वहां पटरियों पर एकत्र होना ‘स्पष्ट रूप से अतिक्रमण का मामला’ था। इस कार्यक्रम (रावण दहन) के लिए रेलवे ने कोई मंजूरी नहीं दी थी। ट्रैक पर इतनी भीड़ होने के बावजूद ट्रेन ड्राइवर द्वारा गाड़ी नहीं रोके जाने को लेकर सवाल उठने पर एक अधिकारी ने कहा, ‘वहां काफी धुआं था जिसकी वजह से चालक कुछ भी देखने में असमर्थ था और गाड़ी घुमाव पर भी थी।’ इस हादसे में 60 लोगों की मौत हो गई और 51 लोग जख्मी हो गए।

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी ने कहा कि मुख्य लाइन के नजदीक दशहरा को लेकर रेलवे प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी गई थी। रेलवे ट्रैक के पास लोग दशहरा देख रहे थे। लोगों को सतर्क रहने की जरूरत थी। यह कहना गलत है कि रेलवे इस घटना के लिए जिम्मेदार है। यह मेन लाइन है और यहां स्पीड को लेकर कोई सीमा नहीं है।

‘हादसे पर राजनीति करना ठीक नहीं’
वहीं, केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने भी घटनास्थल का दौरा करने के बाद कहा कि रेलवे को इस कार्यक्रम को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई थी। इस पर राजनीति करना ठीक नहीं है। हमारी पहली प्राथमिकता घायलों को मदद पहुंचाना है।

अमृतसर प्रशासन पर इस हादसे की जिम्मेदारी डालते हुए रेलवे के आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि स्थानीय अधिकारियों को दशहरा कार्यक्रम की जानकारी थी और इसमें एक वरिष्ठ मंत्री की पत्नी ने भी शिरकत की। यह अतिक्रमण का स्पष्ट मामला है और स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

पटाखों की तेज आवाज, नहीं सुनाई पड़ा ट्रेन का हॉर्न
यह हादसा अमृतसर और मनावला के बीच फाटक नंबर 27 के पास हुआ। हादसे के वक्त उस समय वहां रावण दहन देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी हुई थी। इसी दौरान डीएमयू ट्रेन नंबर 74943 वहां से गुजर रही थी। रावण दहन के वक्त पटाखों की तेज आवाज के कारण ट्रेन का हॉर्न लोगों को नहीं सुनाई पड़ा और वे ट्रेन की चपेट में आ गए।

घटना के बाद पंजाब सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों के लिए पांच-पांच लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया गया है। पंजाब सरकार ने राज्य में एक दिन के राजकीय शोक का ऐलान किया है। साथ ही शनिवार को राज्य के सभी स्कूलों को भी बंद रखने के आदेश जारी किए हैं।

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