Thursday , October 29 2020

अविश्वास: मोदी, सोनिया ने की बैठक, शिवसेना का ‘गोल-मोल’

नई दिल्ली

लोकसभा में शुक्रवार को मोदी सरकार का पहला टेस्ट है। विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर जोरदार बहस की उम्मीद है। 2003 के बाद पहली बार केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया है। उम्मीद है कि सरकार इस टेस्ट में पास हो जाएगी, लेकिन इससे पहले दोनों खेमे में तैयारियां जोरशोर से चल रहीं हैं। गुरुवार सुबह जहां सोनिया गांधी के घर कांग्रेस पार्लियामेंट्री पार्टी (CPP) की बैठक हुई, वहीं पीएम मोदी ने भी मंत्रियों से मुलाकात की है।

आपको बता दें कि यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने बुधवार को ही अविश्वास प्रस्ताव पर मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चाबंदी के पूरे संकेत दे दिए थे। सोनिया गांधी ने अपने बयान से संख्याबल पर आश्वस्त दिख रही सरकार पर दबाव बनाते हुए कहा था कि कौन कहता है कि यूपीए के पास नंबर नहीं है? इसी रणनीति को और धार देने के लिए CPP की बैठक हुई है।

बुधवार को लोकसभा स्पीकर सुमीत्रा महाजन ने तेलुगू देशम पार्टी के अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था। उधर, बीजेपी अपने संख्याबल को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है और उसने अपने सांसदों को थ्री लाइन विप जारी कर रखा है। ऐसा माना जा रहा है कि विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को संख्याबल से पछाड़ मोदी सरकार विधानसभा चुनावों से पहले अपना आत्मविश्वास बढ़ाते हुए जीत का संदेश देना चाहती है। सरकार की तरफ से भी तैयारियां जोरों पर हैं और पीएम मोदी ने अपने मंत्रियों के साथ बैठक की है।

इस बीच केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार ने सोनिया गांधी पर हमला करते हुए कहा, ‘सोनिया जी की गणित कमजोर है। उन्होंने 1996 में भी ऐसा ही कैलकुलेशन किया था। हम जानते हैं कि तब क्या हुआ था। उनकी गणित इस बार भी गलत साबित होगी। सदन के भीतर और बाहर, मोदी सरकार के पास हर जगह बहुमत है। एनडीए अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ वोट करेगा।’ अनंत कुमार का दावा है कि गैर एनडीए दल भी उनके पक्ष में वोट करेंगे।

शिवसेना ने नहीं खोले अपने पत्ते
हालांकि एनडीए की एक प्रमुख सहयोगी शिवसेना ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज सबसे पहली सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब जरूरत होगी हम भी बोलेंगे। अविश्वास प्रस्ताव पर संजय राउत ने कहा, ‘वोटिंग के दौरान हम वही करेंगे जो उद्धव ठाकरे हमें करने को कहेंगे।’

डीएमके साथ, एआईएडीएमके ने किया विरोध
अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से एक दिन पहले विपक्ष की ताकत बंटती नजर आ रही है। तमिलनाडु सीएम पलनीसामी ने कहा है कि एआईएडीएमके अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगी। पार्टी का कहना है कि कावेरी मुद्दे पर किसी ने साथ नहीं दिया इसलिए यह फैसला लिया गया है। हालांकि एआईएडीएमके को पहले से मोदी सरकार के पक्ष में समझा जाता रहा है। उधर, डीएमके ने अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया। एनडीए की बड़ी सहयोगी शिवसेना ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। ऐसा माना जा रहा है कि वह अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से अनुपस्थित रह सकती है।

जानिए संख्याबल का गणित, क्यों आसान है मोदी सरकार की राह
बीजेपी के मैनेजरों का कहना है कि मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव बड़ी आसानी से गिर जाएगा क्योंकि सदन में NDA के पास 315 सांसद (स्पीकर समेत) हैं। आपको बता दें कि 535 सदस्यों में से बहुमत का आंकड़ा 268 है। बीजेपी के पास दो नामित सदस्यों को शामिल करते हुए सदन में 273 सदस्य हैं। हालांकि NDA के अंतिम नंबर में थोड़ा कम-ज्यादा हो सकता है क्योंकि कुछ BJP के सांसद असंतुष्ट हैं जबकि कुछ बीमार या विदेश में हैं।

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