Tuesday , September 22 2020

इसरो का गगनयान: 30 अंतरिक्षयात्रियों की जरूरत

बेंगलुरु

इसी साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से ऐलान किया था कि भारत आने वाले समय में स्पेस के क्षेत्र में मजबूती से कदम बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत 2022 में अपने किसी बेटे या बेटी को अंतरिक्ष में भेजेगा। इसी वादे को पूरा करने के लिए 2004 में पेश किए गए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।

पीएम मोदी ने लालकिले से ही इस अभियान को ‘गगनयान’ नाम भी दिया। बता दें कि इस अभियान की जिम्मेदारी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) के कंधों पर होगी। इसरो ने इसके लिए काम भी करना शुरू कर दिया है। 15 अगस्त से लेकर अबतक इसरो चीफ के सिवन ने तीन बार यह भी कहा है कि यह सिर्फ इसरो मिशन नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘यह एक राष्ट्रीय मिशन होगा, जिसमें देशभर की संस्थाओं के लोग सहयोग करेंगे।’

सिवन जिन संस्थाओं की बात कर रहे हैं, उनमें एयरफोर्स के अंतर्गत काम करने वाला एयरोस्पेस मेडिसिन (आईएएम) भी है। सिवन ने बताया कि आईएएम ही उन अंतरिक्षयात्रियों का चयन करेगा जिन्हें 2022 में अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। जानकारी के मुताबिक, भारत के पहले अंतरिक्षयात्री राकेश शर्मा को भी आईएएम ने ही ट्रेनिंग दी थी।

आईएएम कमांडेंट एयर कॉमोडोर अनुपम अग्रवाल ने बताया कि ट्रेनिंग के अलावा संस्था ने चार प्रमुख क्षेत्रों में योगदान दिया है। ये हैं: बेसिक ऐंड अडवांस ट्रेनिंग, क्रू कैप्सूल की ह्यूमन इंजिनयरिंग और हैबिटैट मॉड्यूल, कैबिनेट एयर क्वालिटी का मूल्यांकन करना और फ्लाइट सर्जन ऑपरेशन।

यूं होगा अंतरिक्ष यात्रियों का सिलेक्शन
आईएएम चीफ अनुपम अग्रवाल ने टाइम्स अखबार से कहा, ‘हमें 30 अंतरिक्ष यात्रियों के पूल की जरूरत है, जिसमें से 15 का चयन किया जाएगा और उन्हें बेसिक ट्रेनिंग दी जाएगी। अगर तीन यात्रियों को भेजने की योजना बनती है तो हम तीन-तीन लोगों के तीन सेट चुनेंगे और इनमें से किसी एक ग्रुप को लॉन्च डेट से पहले तीन महीने अन्य ट्रेनिंग प्रोग्राम से गुजरना होगा।’

बताया गया कि अंतरिक्ष यात्रियों को चुनने की प्रक्रिया काफी जटिल है और इसमें लगभग 12 से 14 महीने का समय लगेगा। बेसिक चीजों में साइकोलॉजिकल और मेडिकल टेस्ट के साथ-साथ कई सारे चेकअप किए जाएंगे।

अग्रवाल ने आगे कहा, ‘इस सब में लगभग तीन महीने का समय लगेगा क्योंकि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि बेस्ट का सिलेक्शन हो। ऐसे लोग जिनकी फिजिकल कंडीशन बेस्ट हो और वे मानसिक रूप से भी उतने ही तैयार हों, इसके लिए पहले से निश्चित टेस्ट किए जाएंगे।’

तीन महीने के बाद जिनका चयन हो जाएगा, उन्हें कठिन मूल्यांकन प्रक्रिया से गुजरना होगा। यह बी देखा जाएगा कि वे अकेलेपन को कैसे हैंडन करते हैं। क्या वे उड़ान के समय पैदा होने अतिरिक्त तापमान को झेल सकते हैं या नहीं और ऐसी स्थिति में उनकी डिसीजन मेकिंग किस तरह की होती है?

अनुपम अग्रवाल आगे कहते हैं, ‘इसी के साथ-साथ बेसिक बायॉलजी, फिजिक्स, सिस्टम्स और अन्य चीजों की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। उन्हें एक-दूसरे का ध्यान रखना होगा इसलिए उन्हें बेसिक फर्स्ट एड और कई अन्य चीजें सिखाई जाएंगी।’

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