Friday , October 23 2020

एससी/एसटी के पिछड़ेपन पर डेटा नहीं: सरकार

नई दिल्ली

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एससी/एसटी सरकारी कर्मचारी प्रमोशन में आरक्षण के खुद हकदार होंगे। साथ ही केंद्र ने कहा कि एम नागराज जजमेंट पर फिर से पुनर्विचार की जरूरत है। केंद्र ने कहा कि पिछड़ापन निर्धारित करने के लिए डेटा का संग्रह न तो व्यवहारिक है और न ही उसकी जरूरत है। मंगलवार को मामले में लिखित में जवाब दाखिल करते हुए केंद्र ने कहा कि एक समुदाय को संसद द्वारा बिल पास करने के बाद ही एससी कैटिगरी की सूची में शामिल कर लिया गया था।

इसी तरह, संसद के संतुष्ट होने के बाद एक समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया गया था क्योंकि समुदाय के सदस्यों के पास भौगोलिक अलगाव के साथ एक विशिष्ट संस्कृति के साथ प्राचीन लक्षण थे और लोगों के संपर्क में शर्म आती थी और इसलिए सदियों से पिछड़ेपन का सामना करना पड़ा। केंद्र ने कहा, ‘जब कोई समुदाय पिछड़ेपन के आधार पर एससी या एसटी कैटिगरी में शामिल किया जाता है। पिछड़ेपन में सामाजिक और आर्थिक मामले की भी बात की जाती है।’

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि 2006 के नागराज जजमेंट के चलते SC-ST के लिए प्रमोशन में आरक्षण रुक गया है। केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि प्रमोशन में आरक्षण देना सही है या गलत इसपर टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन यह तबका 1000 से अधिक सालों से झेल रहा है। उन्होंने कहा कि नागराज मामले में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ को फैसले की समीक्षा की जरूरत है।

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि एससी-एसटी तबके को आज भी प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। केंद्र सरकार ने सर्वोच्च अदालत से कहा है कि 2006 के फैसले पर पुनर्विचार की तत्काल जरूरत है। केंद्र ने कहा कि एससी-एसटी पहले से ही पिछड़े हैं इसलिए प्रमोशन में रिजर्वेशन देने के लिए अलग से किसी डेटा की जरूरत नहीं है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जब एक बार उन्हें एससी/एसटी के आधार पर नौकरी मिल चुकी है तो पदोन्नति में आरक्षण के लिए फिर से डेटा की क्या जरूरत है? वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2006 के नागराज फैसले के मुताबिक सरकार एससी/एसटी को प्रमोशन में आरक्षण तभी दे सकती है जब डेटा के आधार पर तय हो कि उनका प्रतिनिधित्व कम है और वो प्रशासन की मजबूती के लिए जरूरी है।

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