Thursday , October 29 2020

ओपीडी में डॉक्टर को नहीं मिलती थी कुर्सी, दे दिया इस्तीफा

नई दिल्ली

ओपीडी में डॉक्टर के बैठने के लिए कुर्सी नहीं जिसपर बैठकर मरीज का इलाज कर सकें। साफ पानी नहीं, कैन्टीन नहीं जहां पर खाना खा सकें- जैसे मुद्दे उठाते हुए बाबू जगजीवन राम (बीजेआरएम) हॉस्पिटल के एक सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर अंकित ओम ने रिजाइन कर दिया। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर डॉक्टर अंकित ने कहा है कि बीजेआरएम के प्रशासन की व्यवस्था से परेशान हूं और दुखी मन से रिजाइन कर रहा हूं। उम्मीद है कि आने वाले समय में यहां सब ठीक होगा। डॉक्टरों के लिए पर्याप्त सुविधाएं होंगी और वह बिना प्रेशर के काम कर पाएंगे।

एनबीटी से बात करते हुए डॉक्टर ओम ने बताया कि जिस प्रकार हम डॉक्टरों पर दबाव है, उसे देखकर अब मां-बाप कहने लगे हैं कि मेरा बेटा डॉक्टर नहीं बनेगा। उन्हें मेरे डॉक्टर बनने के बाद सबसे ज्यादा इस बात की चिंता है कि कहीं बेटा सूइसाइड न कर ले। अंकित ने कहा, ‘मैंने जनवरी में बीजेआरएम में बतौर सीनियर रेजिडेंट जॉइन किया था लेकिन ओपीडी में डॉक्टर के लिए कुर्सी नहीं है। मरीज को खड़े-खड़े देखना पड़ता है।’ उन्होंने कहा कि यही नहीं, ओपीडी के प्रिस्क्रिप्शन तक घर से लाने पड़ रहे थे। घर से कागज लेकर आते थे, तब मरीज को दवा लिखते थे। कुछ दिन पहले प्रिस्क्रिप्शन दिए गए हैं।

ओम ने आगे कहा कि ऐसी स्थिति में डॉक्टर जान पर खेलकर मरीज का इलाज करता है। अगर किसी मरीज को कुछ हो गया तो डॉक्टर जिम्मेदार होता है लेकिन यहां पर हालात इतने बुरे थे कि पीने का पानी तक डॉक्टर के लिए नहीं था। आवाज उठाई, तब कुछ दिन पहले पानी मिला। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि बार-बार आपसी बातचीत में हमारी डिमांड पूरी करने की बात कही गई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाते हुए लिखा है कि अस्पताल में स्टेशनरी नहीं है, लाइफ सेविंग इक्विपमेंट नहीं हैं। प्रशासन सेकेंडरी केयर हॉस्पिटल चला रहा है, लेकिन यहां पर प्राइमरी हेल्थ केयर जैसी सुविधाएं नहीं। इस वजह से पिछले कुछ महीनों में 10 से 12 डॉक्टर छोड़कर जा चुके हैं।

वहीं इस बारे में अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉक्टर प्रतिभा नंदा ने कहा, ‘कुछ कमियां हैं जिसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। पहले इस अस्पताल में पर्चेज बंद था लेकिन अब सरकार ने आदेश दे दिया है, हमने खरीदारी के लिए फाइल बना कर भेज दी है, जल्द इन समस्याओं का हल निकाल लिया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि यह सच है कि सीनियर रेजिडेंट अस्पताल में टिकते नहीं हैं, उन्हें कहीं और ऑफर मिल जाता है तो वे छोड़कर चले जाते हैं। उनका तीन साल का टर्म होता है और लगभग सभी अस्पतालों में सीनियर रेजिडेंट की कमी है।

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