कर्ज में फंसा मालदीव, भारत के पास चीन को पछाड़ने का मौका

माले

मालदीव के नए राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह शनिवार को पदभार ग्रहण करेंगे। इस अवसर पर मौजूद रहने वाले पीएम मोदी मालदीव के लिए सर्वोच्च रैंकिंग वाले गेस्ट होंगे। चीन की बात करें तो वहां से कल्चर ऐंड टूरेज्म मिनिस्टर ही इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। दरअसल यह केवल कार्यक्रम में मौजूदगी ही नहीं बल्कि मालदीव में बदलते हालात का सबसे सटीक उदाहरण है। मालदीव में चीन समर्थक नेता अब्दुल्ला यामीन को चौंकाऊ रूप से हराने के बाद नए नेता सोलिह ने स्पष्ट रूप से इंडिया फर्स्ट पॉलिसी की वकालत की, जिसका असर इस गेस्ट लिस्ट पर भी दिख रहा है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के कर्जे में फंसा मालदीव भारत के साथ-साथ अमेरिका की तरफ भी मदद के लिए देख रहा है। मालदीव की पूर्ववर्ती सरकार ने अपने प्रायद्वीपीय देश के विकास के लिए चीन से भारी पैमाने पर कर्ज ले रखा है। सोलिह के शपथग्रहण में मोदी की मौजूदगी इस बात का संकेत होगी कि पिछले वर्षों में भारत और मालदीव के बीच गड़बड़ हुए संबंध अब सुधार की ओर हैं। पिछले सालों के दौरान चीन की तरफ मालदीव का झुकाव भारत की कुछ प्रमुख चिंताओं में से एक रहा है।

अब मालदीव की नीति ‘इंडिया फर्स्ट’
वरिष्ठ नेता सोलिह ने वादा किया है कि मालदीव में अब इंडिया फर्स्ट की नीति होगी। उन्होंने कहा है कि 4 लाख से अधिक की आबादी वाले इस मुल्क को अपने तात्कालिक पड़ोसियों के साथ प्रगाढ़ संबंधों की जरूरत है। सोलिह की टीम चीन के लाखों डॉलर के निवेश का भी रिव्यू कर रही है। इसके अलावा चीन के कर्जे और उसके रीस्ट्रक्चरिंग पर भी काम किया जा रहा है।

सोलिह की ट्रांजिशन कमिटी के सदस्य अदम अजीम ने बताया कि सोलिब ने कहा है कि इस मामले की जांच होगी और लोगों की जिम्मेवारी तय की जाएगी। सोलिह की टॉप इकॉनमिक टीम के एक दूसरे सदस्य ने कहा कि हमें लगता था कि चीन का कर्जा करीब 1.5 अरब डॉलर होगा लेकिन यह इससे भी अधिक हो सकता है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम भारत, अमेरिका और सऊदी अरब से वित्तीय मदद के लिए संपर्क कर चुकी है ताकि इस कर्ज से निपटा जा सके।

यह कर्ज मालदीव की जीडीपी के चौथाई हिस्से से भी अधिक है। असल में मालदीव में भारी पैमाने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण कार्य चल रहा है। इसी क्रम में मालदीव में एयरपोर्ट का विस्तार भी हो रहा है। एयरपोर्ट विस्तार को लेकर भी भारत और चीन के संबंध खराब हुए थे। तब मालदीव सरकार ने भारत की जीएमआर इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ 511 मिलियन डॉलर की डील कैंसिल कर दी थी और यह कॉन्ट्रैक्ट चीन की अर्बन कंस्ट्रक्शन ग्रुप कंपनी लिमिटेड को सौंप दिया था।

अब भारत को मालदीव में अपने लिए एक मौका दिख रहा है। भारत ने सोलिह की टीम को आश्वस्त किया है कि वह किसी भी तरह की मदद के लिए तैयार है। भारत ने कुछ साल पहले मालदीव को 75 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन दी थी। अधिकारियों के मुताबिक संबंध खराब होने तक इसका केवल एक तिहाई ही इस्तेमाल हो पाया था। इसके अलावा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और मालदीव मॉनिटरी अथॉरिटी के बीच करंसी बदलने को लेकर भी अग्रीमेंट हैं, जो वित्तीय स्थिरता में मद कर सकती है।

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