Tuesday , September 22 2020

‘कर्मचारियों को RSS शाखा में नहीं जाना चाहिए’: चिदंबरम

इंदौर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को ‘राजनीतिक संगठन’ करार देते हुए पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने रविवार को कांग्रेस के इस चुनावी वादे को सही ठहराया कि मध्य प्रदेश की सत्ता में आने पर वह इस संस्था की शाखाओं में सरकारी कर्मचारियों के जाने पर रोक लगाएगी। चिदंबरम ने कहा, ‘वे (संघ के लोग) इस बात से कितना भी इनकार करें, लेकिन हकीकत यही है कि संघ एक राजनीतिक संगठन है। इस संगठन का सियासी अजेंडा है।’

उन्होंने कहा, ‘मध्य प्रदेश की सत्ता में आने पर कांग्रेस अपना संबंधित चुनावी वादा जरूर निभाएगी, ताकि संघ की शाखाओं में सरकारी कारिंदों के शामिल होने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके। इस वादे में कुछ भी गलत नहीं है।’ पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, ‘प्रदेश की जनता भी इस कदम का स्वागत करेगी, क्योंकि सरकारी कारिंदों को किसी राजनीतिक संगठन से नहीं जुड़ना चाहिए।’

कांग्रेस ने शनिवार को जारी अपने ‘वचन पत्र’ (चुनावी घोषणा पत्र) में ‘सामान्य प्रशासन और प्रशासनिक सुधार’ के अध्याय में कहा है कि 28 नवम्बर को होने वाले विधानसभा चुनावों के जरिए सत्ता में आने पर शासकीय परिसरों में संघ की शाखाएं लगाने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसके साथ ही, सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों को इन शाखाओं में हिस्सा लेने की छूट के आदेश को भी रद्द किया जाएगा।

‘हमने कभी नहीं कहा कि राम काल्पनिक किरदार थे’
चिदंबरम ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस ताजा आरोप को सिरे से खारिज किया कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की राह में कांग्रेस सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने कहा, ‘किसी भी मंदिर के निर्माण में कांग्रेस कोई बाधा नहीं है। राम मंदिर का मुकदमा फिलहाल शीर्ष न्यायालय में लम्बित है। हमारा स्पष्ट मत है कि पहले अदालत इस मामले में अपना फैसला सुनाए। फिर हम इस मसले का समाधान खोजने की कोशिश करेंगे।’ पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, ‘हम बहुत खुश होंगे कि अगर इस मुकदमे से जुड़े सभी पक्ष राम मंदिर मसले का अदालत से बाहर कोई हल निकाल लें।’ चिदंबरम ने एक सवाल पर कहा, ‘मेरी जानकारी के मुताबिक हमारी पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने ऐसा बयान कभी नहीं दिया था कि राम एक काल्पनिक किरदार थे।’

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