कश्मीर में SPOs की हत्या के पीछे पाक का हाथ, मिले सबूत

नई दिल्ली

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के मेसेज को इंटरसेप्ट कर दावा किया है कि कश्मीर में स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स (SPOs) की हत्याओं में पाक का हाथ है। इन संदेशों में आईएसआई के लोग कश्मीर में स्थित आतंकियों को SPOs का अपहरण कर उनकी हत्या करने का निर्देश देते हुए पाए गए हैं। यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र महासंघ के इतर भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनके पाकिस्तानी काउंटरपार्ट शाह महमूद कुरैशी के बीच वार्ता की घोषणा के 24 घंटे भीतर ही इसे रद्द भी कर दिया गया।

भारतीय खुफिया एजेंसी के सूत्रों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि नाटकीय रूप से रद्द हुई इस वार्ता के पीछे पाकिस्तान से आने वाले मेसेज हैं। खुफिया एजेंसी ने सीमा पार से भेजे गए जिन संदेशों को पकड़ा है उसमें जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकियों को अपहृत एसपीओ की हत्या का निर्देश दिया गया था। पाकिस्तान से आने वाले ये संदेश इतने स्पष्ट थे कि इसमें मारे जाने वाले एसपीओ को नाम का भी जिक्र किया गयया था।

इन संदेशों में 3 SPOs की हत्या में का निर्देश तो दिया ही गया था साथ ही आतंकियों को एक सिविलियन को छोड़ने का आदेश भी था। पाकिस्तान से ये संदेश इतनी तेजी से आए कि भारतीय एजेंसियों को हत्यारों को नाकाम करने का मौका ही नहीं मिला। अपहरण करने के बाद मारे गए SPOs निसार अहमद, फिरदौस अहमद और कुलवंत सिंह की डेड बॉडी एक बाग से मिली, जबकि एक एसपीओ के भाई फयाज अहमद भट को आतंकियों ने जाने दिया।

इन हत्याओं में पाकिस्तान के हाथ होने के सबूत मिलने पर मोदी सरकार ने इस मामले को काफी गंभीरता से लिया है। स्पष्ट रूप से जम्मू-कश्मीर में स्थानीय चुनावों को प्रभावित करने के लिए अंजाम दिए गए इस आतंकी कृत्य के बाद सरकार ने पाकिस्तान से प्रस्तावित बातचीत तुरंत रद्द कर दी है। बताया जा रहा है कि एसपीओ की हत्याओं के पीछे का उद्देश्य अरसे बाद जम्मू-कश्मीर में होने जा रहे स्थानीय चुनावों को प्रभावित करना है। सूत्रों ने बताया कि इस तरह की घटनाओं से लोगों के साथ-साथ पुलिस जवानों के बीच भी भय का वातावरण बनानेकी कोशिश की गई।

गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि इस बात की आशंका थी कि आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर के स्थानीय चुनावों को प्रभावित करने की हरसंभव कोशिश करेंगे। हालांकि पहले भी जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों के अपहरण और हत्याएं हुई हैं लेकिन आतंकी अब सिविलियन समझे जाने वाले एसपीओ को निशाना बना रहे हैं। एसपीओ की संख्या काफी है और अक्सर वे बिना हथियार होते हैं, ऐसे में उनका निशाना बनाना आतंकियों के लिए आसान है।

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