Tuesday , October 20 2020

केंद्र के दो सर्वे में ‘गायब’ हो गए दो लाख बच्चे, सुप्रीम कोर्ट हैरान

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दो सर्वे में बाल संरक्षण संस्थानों में भर्ती बच्चों की संख्या में भारी अंतर के खुलासे पर अपनी हैरानी जाहिर की. सर्वे में दो लाख से अधिक बच्चों का अंतर दिखाया गया है.महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के आदेश पर चाइल्डलाइन एनजीओ द्वारा 2016-17 में सर्वे किया गया. सर्वे में देशभर के 9500 बाल संरक्षण संस्थानों में 4.3 लाख बच्चों के होने की बात सामने आई है.

लेकिन राज्यों से प्राप्त जानकारी के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा इकट्ठे किए गए आंकड़ों के अनुसार देशभर में 8600 संस्थानों में 2.6 लाख बच्चे हैं.जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “इन दो लाख बच्चों के साथ क्या हुआ? उनमें से कितने गायब हैं, क्योंकि हम देख सकते हैं कि गोद लेने की संख्या नगण्य है. हम यह देखकर हैरान हैं.” बेंच ने कहा कि यह ‘व्यथित’ कर देने वाला है कि बच्चों की संख्या को कम कर दिया गया है. बेंच ने आगे कहा, “बच्चों के पास भी दिल और आत्मा है. उन्हें केवल संख्या के तौर पर देखा जा रहा है. यह बहुत गंभीर मुद्दा है.”

जब अमीकस क्यूरी अपर्णा भट्ट ने इस अंतर का हवाला दिया तो खंडपीठ ने केंद्र से जानना चाहा कि संख्याओं में अंतर के पीछे क्या कारण हो सकता है? केंद्र की तरफ से पेश वकील आर बालासुब्रमण्यम ने बेंच को बताया कि बाल संरक्षण संस्थाओं द्वारा अधिक धन प्राप्त करने के लिए बच्चों की संख्या को बढ़ाकर बताया जा रहा है लेकिन इस तर्क से कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ.इस पर बालासुब्रमण्यम ने कहा कि केंद्र इस अंतर के बारे में जवाब देने के लिए राज्यों को उपयुक्त प्रश्न भेजेगा. कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई पर केंद्र को जवाब से बेंच को अवगत कराना चाहिए.

इसके साथ ही बेंच ने आश्रय घरों की निगरानी और अवलोकन के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय समितियों की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा ताकि मुजफ्फरपुर और देवरिया में बच्चों के यौन उत्पनीड़न की हालिया घटनाएं दोबारा न हों.बेंच ने कहा कि राज्यों को ऐसी समितियों का गठन करने में कोई समस्या नहीं है, केंद्र से अगले तारीख पर सकारात्मक जवाब देने के लिए कहा गया है.समितियों में सरकारी अधिकारियों और सिविल सोसाइटी के सदस्य शामिल होने की संभावना है.

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