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केंद्र विदेश से मदद नहीं लेगी तो नुकसान की भरपाई कौन करेगाः केरल सरकार

तिरुवनंतपुरम

केरल में आई भयावह बाढ़ के बाद मिल रही राहत को लेकर केंद्र और राज्य सरकार में मतभेद सामने आया है। बुधवार को केंद्र सरकार ने केरल में बाढ़ राहत अभियान के लिए विदेशों से वित्तीय सहायता स्वीकार करने की संभावना से इनकार किया है। बता दें, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने केरल की सहायता के लिए 700 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव भेजा था, राज्य तो इसे स्वीकार करने के पक्ष में है लेकिन केंद्र की ओर से असहमति बनी है।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए केवल घरेलू प्रयासों पर निर्भर रहने के फैसले पर विचार किया है। कांग्रेस ने उन इन रिपोर्टों को निराशाजनक बताया है। इसके साथ ही पार्टी ने नियमों में संशोधन के लिए प्रधानमंत्री से कदम उठाने का अनुरोध किया है। वहीं केरल के सीएम पिनराई विजयन ने कहा है कि 2016 राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति का कहना है, ‘यदि किसी अन्य देश की सरकार स्वैच्छिक रूप से आपदा पीड़ितों के साथ एकजुटता में सद्भावना के तौर पर सहायता प्रदान करती है, तो केंद्र सरकार प्रस्ताव स्वीकार कर सकती है।’ उन्होंने कहा कि अभी केवल बात हो रही है, देखते हैं कि क्या होता है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने पीएम को लिखा पत्र
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता ओमन चांडी ने कहा कि नियम ऐसे होने चाहिए जो लोगों की परेशानियों को दूर करे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा, ‘विदेशी वित्तीय सहायता को स्वीकार करने के खिलाफ अगर कोई बाधा मौजूद है तो कृपया इस मामले में गंभीरता से विचार करें और उपयुक्त संशोधन लाएं।’ चांडी ने कहा कि केरल को अधिकतम संभव सहायता प्रदान करने के लिए केंद्र को और कदम उठाने चाहिए। केरल में बाढ़ के कारण 231 लोगों की मौत हो गयी है और 14 लाख से ज्यादा लोग बेघर हुए हैं। उन्होंने कहा कि संकट की गंभीरता को देखते हुए, केंद्र द्वारा घोषित वित्तीय सहायता ‘निराशाजनक’ थी।

स्वीकार की जा सकती है सहायता
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने केरल में बाढ़ राहत कार्यों के लिए 10 करोड़ अमेरिकी डालर (700 करोड़ रूपए) की वित्तीय सहायता की पेशकश की है। विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात की सहायता को स्वीकार करने में कुछ भी गलत नहीं है। यूएई की सहायता पेशकश की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा था कि राज्य के लाखों लोग यूएई को अपना ‘दूसरा घर’ मानते हैं। करीब तीस लाख भारतीय यूएई में काम करते हैं, इनमें से 80 फीसदी केरल निवासी हैं।

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