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केरल: मदद लौटाने पर संग्राम, UAE बोला-दिया ही कब जनाब

नई दिल्ली

यूएई की मदद की पेशकश ठुकराने के मामले पर केंद्र और केरल सरकार के बीच विवाद अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि यूएई के राजदूत ने एक इंटरव्यू में कहा कि संयुक्त अरब अमीरात ने अभी तक अधिकारिक तौर पर ऐसा कोई ऐलान नहीं किया है, जिसमें मदद की रकम का भी जिक्र हो। राजदूत अहमद अलबन्ना ने कहा कि केरल बाढ़ के बाद चल रहे रिलीफ ऑपरेशन का आकलन किया जा रहा है, ऐसे में बताई जा रही राशि को ‘फाइनल’ नहीं कहा जा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘बाढ़ के बाद रिलीफ ऑपरेशन की जरूरतों का आकलन किया जा रहा है। क्योंकि अभी तक इस पर कोई अंतिम मुहर नहीं लगी है इसलिए इस राशि को फाइनल नहीं कहा जा सकता है।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या ऐसा कहा जा सकता है कि यूएई ने 700 करोड़ रुपये का मदद का ऐलान नहीं किया है? तो राजदूत ने कहा, ‘हां, यह सही है। यह अभी तक फाइनल नहीं हुआ है। अभी तक इस बारे में कोई अधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।’

इससे पहले केरल के सीएम पी विजयन ने कहा था कि अबूधाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयन ने पीएम मोदी के साथ फोन पर बातचीत में केरल के लिए 700 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद की पेशकश की है। राजदूत अहमद ने कहा कि केरल राहत कार्य के लिए फंड अलॉटमेंट करने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि केरल की स्थिति का आकलन करने के लिए कमिटी का गठन किया है, जो अभी अपना काम कर रही है।

राजदूत ने कहा, ‘हम भारत में आर्थिक मदद के नियमों को जानते-समझते हैं इसलिए सरकार द्वारा बनाई गई कमिटी भारत सरकार के अधिकारियों के साथ इस मामले में कोऑर्डिनेट कर रही है। इसके अलावा त्वरित मदद के लिए वह कमिटी स्थानीय अधिकारियों के साथ भी बातचीत कर रही है।’ कमिटी मदद के लिए यूएई और भारत के कई और समूहों से भी बात कर रही है।

बता दें कि कुछ दिनों पहले ही केंद्र सरकार ने कहा था कि वह केरल के लिए की गई विदेशी मदद की सराहना करते हैं, लेकिन वर्तमान नीतियों के चलते वह इसे स्वीकार नहीं कर सकते हैं। इसके बाद इस मामले पर केंद्र और केरल सरकार के बीच काफी बयानबाजी भी हुई। सीपीएम के केरल अध्यक्ष कोडियेरी बालाकृष्णन ने कहा केंद्र की आलोचना करते हुए मदद ठुकराने को ‘बदले की भावना’ बताया।

बालाकृष्णन ने कहा, ‘केंद्र द्वारा मदद की पेशकश को ठुकराना गलत है। मदद स्वीकार करने से मना करना बदले की भावना से प्रेरित है।’ उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार यूएई द्वारा पेश की गई 700 करोड़ रुपये की मदद को स्वीकार नहीं करना चाहती है तो उसे इतनी ही रकम केरल को देनी चाहिए।

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता ओमन चांडी ने कहा कि नियम ऐसे होने चाहिए जो लोगों की परेशानियों को दूर करे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा, ‘विदेशी वित्तीय सहायता को स्वीकार करने के खिलाफ अगर कोई बाधा मौजूद है तो कृपया इस मामले में गंभीरता से विचार करें और उपयुक्त संशोधन लाएं।’ चांडी ने कहा कि केरल को अधिकतम संभव सहायता प्रदान करने के लिए केंद्र को और कदम उठाने चाहिए। केरल में बाढ़ के कारण 231 लोगों की मौत हो गयी है और 14 लाख से ज्यादा लोग बेघर हुए हैं। उन्होंने कहा कि संकट की गंभीरता को देखते हुए, केंद्र द्वारा घोषित वित्तीय सहायता ‘निराशाजनक’ थी।

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