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चुनाव से पहले सरकार को राहत देगा GDP डेटा!

नई दिल्ली

जनवरी-मार्च तिमाही में 7.7% की जीडीपी ग्रोथ के बाद एक बाद फिर से मजबूत तिमाही देखने को मिल सकता है। यानी, कहा जा सकता है कि नए वित्त वर्ष का आगाज बेहद शानदार होनेवाला है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) और ऐग्रिकल्चर (खेती) के शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय अर्थव्यवस्था ने मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.5% से 7.7% की विकास दर हासिल की होगी। हालांकि, आधिकारिक आंकड़े अगले हफ्ते आने हैं। कुछ अर्थशास्त्री तो 8% से भी ज्यादा की ग्रोथ का अंदाजा लगा रहे हैं।

अगले वर्ष होनेवाले लोकसभा चुनाव से पहले अर्थव्यवस्था के रफ्तार पकड़ने से सरकार को थोड़ी राहत मिलेगी जिसकी आर्थिक उपलब्धियों की तुलना पूर्ववर्ती यूपीएस सरकार की उपलब्धियों से की जा रही है। दरअसल, भारतीय अर्थव्यवस्था को अनुकूल परिस्थितियों से भी मदद मिल रही है। पिछले वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) ग्रोथ रेट 5.6% तक गिर गई थी। उसकी वजह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने से पैदा हुई मुश्किलें और नोटबंदी के आंशिक असर भी हैं। वित्त वर्ष 2017-18 में वित्त वर्ष 2016-17 में 7.1% से घटकर 6.7% रह गया था। अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2018-19 में 7.4% की जीडीपी ग्रोथ रहेगी। प्राइवेट एजेंसियों के भी अनुमान इसी के ईर्द-गीर्द हैं।

ऐक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री सौगत भट्टाचार्य कहते हैं, ‘हमें पहली तिमाही में 8% से ज्यादा जीडीपी ग्रोथ रेट की उम्मीद है।’ ऐक्सिस बैंक ने 8% से 8.3% की जीडीपी ग्रोथ और 8.1% से 8.4% के ग्रॉस वैल्यु ऐडेड (जीवीए) रहने का अनुमान जताया है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) 31 अगस्त को अप्रैल-जून तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी करेगा।

जीडीपी ग्रोथ के मजबूत आंकड़े का असर आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा पर भी पड़ेगी जिसके लिए बैठक अगले 3 से 5 अक्टूबर हो होनी है। यस बैंक के चीफ इकॉनमिस्ट शुभदा राव का अनुमान है कि अनुकूल आर्थिक हालात और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के जोर पकड़ने की वजह से पहली तिमाही में 8% की जीडीपी ग्रोथ रहेगी जबकि जीवीए 7.9% रहेगा।

इस वर्ष अप्रैल से जून के दरम्यान देश का औद्योगिक उत्पादन 5.2% बढ़ा है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ का आंकड़ा 5.2% रहा जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही में महज 1.6% रहा था। भट्टाचार्य ने कहा कि घरेलू मांग में सुधार के संकेत मिल रहे हैं जिसने मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज इंडस्ट्रीज को बल दिया है।

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