Wednesday , September 23 2020

‘जिनका पालन हो सके, वही फैसले सुनाए कोर्ट और सरकार’ : अमित शाह

तिरुवनंतपुरम

केरल के कन्नूर में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पार्टी कार्यालय का उद्घाटन करने पहुंचे तो इस मौके पर उन्होंने न सिर्फ राज्य की लेफ्ट सरकार को घेरा बल्कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी सवाल उठाए। शाह ने कहा कि सरकार और कोर्ट को ऐसे फैसले नहीं सुनाने चाहिए, जिनका पालन न करवाया जा सके और जो आस्था से जुड़े हों। शाह ने कहा, ‘कन्नूर में 120 बीजेपी कार्यकर्ता मारे गए। जिस विचारधारा के लिए इन बीजेपी कार्यकर्ताओं ने बलिदान दिया है, मैं उनके परिवार को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि हम उसे कभी पराजित नहीं होने देंगे।’

बीजेपी कार्यालय का उद्घाटन करते हुए अमित शाह ने कहा कि कन्नूर हमारे लिए तीर्थस्थल जैसा है। उन्होंने कहा, ‘केरल सरकार दमन का कुचक्र चला रही है। 26 अक्टूर से अब तक 2000 से ज्यादा बीजेपी और आरएसएस के कार्यकर्ताओं को जेल में डालने का काम किया गया है। मैं उनको कहना चाहता हूं कि डैमेज ऑफ कंट्रोल के तहत जिन्हें जेल में डाला गया है, उन्होंने किसकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है?’

‘अयप्पा भक्तों के साथ खड़ी है बीजेपी’
राज्य सरकार को घेरते हुए शाह ने कहा, ‘कम्युनिस्ट सरकार कान खोलकर सुन ले कि जिस तरह अयप्पा के भक्तों पर दमन का कुचक्र चलाया जा रहा है, बीजेपी अयप्पा भक्तों के साथ चट्टान की तरह खड़ी रहेगी।’ उन्होंने कहा, ‘मैं मुख्यमंत्री विजयन को चेतावनी देने आया हूं कि अगर दमन की कोशिश को रोका नहीं गया तो बीजेपी कार्यकर्ता की ईंट से ईंट बजा देगा। केरल के अंदर मंदिरों की परंपरा को खत्म करने की कोशिश कम्युनिस्ट सरकार कर रही है।’

“केरल में इन दिनों आस्था, श्रद्धा, धर्म और शासन के दमन के बीच में संघर्ष चल रहा है। केरल की सरकार सबरीमाला मंदिर के अंदर जो श्रद्धालु और जनता अपनी आस्था के लिए संघर्ष कर रही है, उस पर दमन का कुचक्र चला रही है। 26 अक्टूबर से अब तक 2 हजार से ज्यादा बीजेपी, आरएसएस के कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया है। केरल की कम्युनिस्ट सरकार कान खोलकर सुन ले, अयप्पा के भक्तों पर जिस तरह दमन का कुचक्र चल रहा है, इसके खिलाफ बीजेपी चट्टान की तरह खड़ी रहेगी।”-अमित शाह

‘पालन हो सके, ऐसे ही आदेश दिए जाएं’
सबरीमाला विवाद पर अमित शाह ने कहा, ‘सरकार और कोर्ट को ऐसे आदेश देने चाहिए, जिनका पालन हो सके। उन्हें आदेश ऐसे नहीं देने चाहिए जो लोगों की आस्था का सम्मान न कर सकें। आर्टिकल 14 की दुहाई दी जाती है और 25 व 26 के तहत धर्म के अनुसार रहने का मुझे अधिकार है।’ उन्होंने कहा, ‘एक मौलिक अधिकार दूसरे को नुकसान कैसे पहुंचा सकता है। हिंदू धर्म ने कभी परंपराओं में महिलाओं के साथ अन्याय नहीं किया, बल्कि उनको देवी मानकर पूजा है।’

‘परंपराएं तोड़ने का किसी को हक नहीं’
शाह ने कहा, ‘कोर्ट के जजमेंट के नामपर जो परंपराओं को तोड़ना चाहते हैं, उनको बता दूं कि देशभर के कई मंदिर ऐसे हैं जो अलग-अलग परंपराओं से चलते हैं। भगवान अयप्पा के कई मंदिर देश में बने हैं, वहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित नहीं है। इस मंदिर में अयप्पा की ब्रह्मचारी मूर्ति लगी है, इसलिए ऐसा है। देश के कई मंदिर ऐसे भी हैं जहां सिर्फ महिलाएं प्रवेश कर सकती हैं, पुरुषों का प्रवेश वर्जित है।’ शाह ने कहा कि सब इसी फैसले के पीछे पड़े हैं।

Did you like this? Share it:

About editor

Check Also

LAC पर खत्म होगी टकराव की स्थिति? अब और सैनिक नहीं भेजेंगे भारत और चीन

नई दिल्ली भारत और चीन के बीच कमांडर लेवल की 6ठे दौर की मीटिंग में …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)
67 visitors online now
5 guests, 62 bots, 0 members
Max visitors today: 70 at 01:56 am
This month: 227 at 09-18-2020 01:27 pm
This year: 687 at 03-21-2020 02:57 pm
All time: 687 at 03-21-2020 02:57 pm