तेल पर दुविधा में मोदी सरकार, सस्ता करे या फिर इन्हें मनाए

नई दिल्ली

पेट्रोल और डीजल के दामों ढाई रुपये की कटौती करके केंद्र सरकार ने भले ही लोगों के गुस्से को कम करने का प्रयास किया है, लेकिन अब उसे एक और मोर्चे पर सफाई देनी पड़ रही है। इस कटौती के बाद केंद्र सरकार अब निवेशकों को यह भरोसा दिलाने में जुटी है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सरकारी रेग्युलेशन का पुराना दौर वापस नहीं लौटेगा। इस कटौती के बाद से तेल कंपनियों में निवेश करने वाले लोगों में चिंता देखी जा रही है।

यही वजह है कि ढाई रुपये की कटौती के बाद से शेयर बाजार में तेज गिरावट देखी जा रही है। गुरुवार को इस ऐलान के बाद मार्केट तेजी से गिरा था, जो शुक्रवार को भी जारी रहा। सरकार ने ढाई रुपये उत्पाद में शुल्क में कटौती करके और एक रुपये कंपनियों के मुनाफे में से कटौती करके आम लोगों को यह राहत दी है।

निवेशकों में इस फैसले को लेकर यह चिंता है कि अब एक बार फिर से तेल कंपनियों के मुनाफे पर चोट पहुंचाने वाली स्थिति आ सकती है। कच्चे तेल के उत्पादन में कमी और रुपये की तेज गिरावट के चलते बीते कुछ महीनों में देश में पेट्रोल और डीजल की महंगाई बढ़ी है।

निवेशकों को भरोसा दिलाते हुए शनिवार को फेसबुक पोस्ट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने खुद लिखा, ‘यह बात मैं अलग से स्पष्ट कर देता हूं कि तेल कीमतें एक बार फिर से सरकारी नियंत्रण के दौर में नहीं जाएंगी।’ पीएम मोदी ने अक्टूबर 2014 में तेल की कीमतों को सरकार के नियंत्रण से बाहर करने का फैसला लिया था। तब से हर दिन सुबह 6 बजे तेल की कीमतें बाजार के आधार पर तय होती हैं।

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