Tuesday , September 29 2020

दिल्ली: ‘धर्मादेश’ में संत बोले- मंदिर अभी बनाएंगे

नई दिल्ली

अयोध्या में राम मंदिर के लिए 1992 जैसे आंदोलन के संघ से मिले संकेत के अगले शनिवार को ही दिन देश की राजधानी में राम मंदिर के लिए हलचल तेज हो गई। तालकटोरा स्टेडियम में जुटे 1000 से ज्यादा संतों ने दिसंबर में ही राम मंदिर का काम शुरू करने का ऐलान कर डाला। रविवार को राम मंदिर पर प्रस्ताव भी पास किया जाएगा।

धर्मादेश संत महासम्मेलन नाम से 125 संप्रदायों की इस दो दिनी बैठक में राम मंदिर न्यास के सदस्य रामविलास वेदांती ने कहा कि आपसी सहमति से दिसंबर से अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनना शुरू होगा। अगर मुस्लिम चाहें तो लखनऊ या कहीं और मस्जिद बना सकते हैं। लेकिन, वह खुदा की मस्जिद होगी, बाबरी मस्जिद नहीं। विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने वेदांती के प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार संसद के शीत सत्र में कानून लाकर मंदिर निर्माण की राह खोले तो ज्यादा अच्छा होगा। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने संतों को निराश किया है, ऐसे में कोई बड़ा फैसला जरूर होगा। सम्मेलन में मस्जिद का जिक्र होने पर अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष जगद्गुरु रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य ने आपत्ति जताई और कहा कि हमारा काम मस्जिद बनाने का नहीं है।

6 दिसंबर को शिलान्यास?
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कहा कि जिस तरह मंदिर निर्माण पर टालमटोल के 1992 के पहले हालात थे, वैसी ही न्यायिक परिस्थितियां फिर बन रही हैं। संतों की बैठक में विश्व हिंदू परिषद से जुड़ीं साध्वी प्राची ने कहा कि 6 दिसंबर को बाबरी ढांचा गिराया गया था। हमें उसी दिन मंदिर का शिलान्यास करना है।

इसी साल मिलेगा शुभ समाचार : रामदेव
संघ और बीजेपी नेताओं की बयानबाजी के बीच बाबा रामदेव ने भी बड़ा बयान दिया है। बाबा रामदेव ने कहा है कि संतों और रामभक्तों ने संकल्प किया है कि राम मंदिर में अब और देर नहीं। मुझे लगता है कि इसी वर्ष शुभ समाचार देश को मिलेगा। अगर न्यायालय के निर्णय में देर हुई तो संसद में जरूर इसका बिल आएगा, आना ही चाहिए। राम जन्मभूमि पर राम मंदिर नहीं बनेगा तो किसका बनेगा?

‘मूर्ति बनाने से रोका तो देख लेंगे’
यूपी के डेप्युटी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मंदिर मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए हम इस मामले में कुछ नहीं कर सकते। मंदिर निर्माण की तारीख भी नहीं बता सकते, लेकिन अयोध्या में भगवान राम की भव्य मूर्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता, अगर कोई रोकता है तो हम देख लेंगे।

‘बीजेपी बताएं, राम मंदिर अजेंडे में है या नहीं’
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या राम मंदिर मामले की सुनवाई जनवरी तक टलने के बाद साधु-संतो की चिन्ता एक बार फिर से राम मंदिर निर्माण को लेकर बढ़ गई है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि ने कहा है कि, सुप्रीम कोर्ट से राम मंदिर विवाद का हल निकलने की अब कोई उम्मीद नहीं बची हैं। इसलिए मंदिर निर्माण के अब दो ही रास्ते बचे हैं। केन्द्र सरकार संसद में कानून बनाकर मंदिर का निर्माण करे या फिर शिया वक्फ बोर्ड, सुन्नी वक्फ बोर्ड और मुसलमान भाई मंदिर निर्माण के लिए आगे आएं और देश में एक मिसाल कायम करें।

गिरी ने कहा कि, मुसलमान भाईयों को इस मामले में आगे आना चाहिए और उन्हें कहना चाहिए कि भगवान राम का जन्म वहीं पर हुआ था, इसलिए मंदिर का भी निर्माण होना चाहिए। महंत नरेन्द्र गिरि ने कहा कि, राम मंदिर निर्माण के लिए साधु-संतों के साथ ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद भी पहल कर रहा है। लेकिन अब बीजेपी को भी इस मामले में पहली शुरुआत करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर हिन्दुओं की आस्था का विषय है, इसलिए राम मंदिर का निर्माण अब नहीं होगा तो कभी नहीं होगा। महंत नरेन्द्र गिरि ने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ ही सभी साधु संतों की भी यही मांग है कि कानून बनाकर राम मंदिर का निर्माण कराया जाये। महंत नरेन्द्र गिरि ने बीजेपी से भी मंदिर मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जबकि बीजेपी को बताता होगा कि राम मंदिर उसके अजेंडे में है कि नहीं और मंदिर का निर्माण कब तक शुरु होगा।

भूमि अधिग्रहण करे केंद्र : गोविंदाचार्य
संघ विचारक केएन गोविंदाचार्य ने राम मंदिर मुद्दे पर शनिवार को पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर भूमि अधिग्रहण की मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा है कि सरकार अध्यादेश के जरिए इस कानून में संशोधन कर राम जन्मभूमि परिसर की पूरी जमीन का अधिग्रहण करे। राम जन्मभूमि की 2.77 एकड़ जमीन समेत पूरे परिसर की 67 एकड़ भूमि का स्वामित्व 1993 से केंद्र सरकार के पास है। केंद्र ने इसके लिए कानून बनाया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 1994 के फैसले में मान्यता भी दे दी थी। कानून में भूमि के इस्तेमाल पर लगाई गई पाबंदियों को भी अदालत सही ठहराया था। इसी वजह से मंदिर निर्माण में संवैधानिक अड़चन आ रही हैं। भूमि के मिल्कियत विवाद में सरकार को भूमि अधिग्रहण का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तेजी से सरदार वल्लभ भाई पटेल की सबसे ऊंची मूर्ति बनाई गई, उसी तेजी से राम मंदिर का निर्माण भी हो जाए तो जनता से मिला ऐतिहासिक जनादेश सार्थक होगा।

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