दिल्ली में शाह से पहले शरद से मिले कुशवाहा, पाला बदलने की अटकलें गर्म

दिल्ली

बिहार में एनडीए के अपने सहयोगियों से तल्ख होते रिश्तों का एक और इशारा देते हुए केंद्रीय मंत्री और आरएलएसपी प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा ने सोमवार सुबह दिल्ली में विपक्षी नेता शरद यादव से मुलाकात की.दिल्ली दौरे पर आए कुशवाहा की जेडीयू नेता शरद यादव से मुलाकात पहले से तय नहीं थी. ऐसे में मेल-मिलाप के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं और उनके महागठबंधन में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं. इससे पहले वह इसी तरह आरजेडी नेता तेजस्वी यादव से भी मुलाकात कर चुके हैं.

दरअसल सोमवार को दिल्ली में कुशवाहा का बीजेपी प्रमुख अमित शाह से मिलने का कार्यक्रम था. ऐसी खबरें थी कि वह इस दौरान पार्टी के विधायकों को जेडीयू द्वारा ‘बरगलाने’ की कोशिशों की शिकायत करेंगे. खबर है कि आरएलएसपी के दो विधायक जेडीयू में शामिल होने वाले हैं.शरद यादव से मुलाकात पर कुशवाहा ने कहा, ‘हमारी पार्टी तो अलग है, लेकिन मुद्दे एक जैसे हैं.’ उन्होंने अपने विधायक सुधांशु शेखर और ललन पासवान के जेडीयू में शामिल होने की खबरों पर कहा कि नीतीश कुमार उन्हें बर्बाद करने पर तुले हैं.

उपेन्द्र कुशवाहा ने खुद को एनडीए का हिस्सा बताते हुए कहा कि नीतीश कुमार आरएलएसपी के विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि एक ओर वे हमारे एमएलए तोड़ रहे हैं, दूसरी ओर हमारे कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज करवा रहे हैं.दरअसल रविवार को ही उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी के दो विधायकों के जेडीयू में शामिल होने की अटकलों को लेकर नीतीश कुमार पर निशाना साधा था.

केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट किया था, “वैसे तो नीतीश कुमार जी, आपको तोड़-जोड़ में महारत हासिल है. बसपा, लोजपा, आरजेडी, कांग्रेस और अब आरएलएसपी! लेकिन बिहार व देश की जनता सब देख रही है. हम गरीबों, शोषितों, वंचितों, दलितों, पिछड़ों और गरीब सवर्णों के हक के लिए लड़ते रहेंगे. आप चाहे जितना प्रहार करें.”

उन्होंने दूसरा ट्वीट करते हुए लिखा, “समेटिए नीतीश कुमार जी अपने लोगों को. केवल दहेज लेना-देना ही अपराध नहीं है, बल्कि किसी पार्टी को डैमेज करने हेतु लोभ व प्रलोभन देना भी अपराध एवं घोर अनैतिक कुकृत्य है. ऐसे यह कोई नहीं मनेगा कि आपकी पार्टी में ऐसा कुकृत्य, आपकी सहमति के बगैर हो रहा होगा.”

बता दें कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और जेडीयू ने जब से बिहार की बराबर सीटों पर लड़ने का ऐलान किया है, तभी से कुशवाहा नाराज बताए जा रहे हैं. बीजेपी की तरफ से ऐसा किया गया था कि एनडीए गठबंधन के तहत कुशवाहा की पार्टी के लिए दो सीटें छोड़ी जा सकती हैं. यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि 2014 के चुनाव में आरएलएसपी ने तीन पर लड़ते हुए तीनों पर जीत दर्ज की थी. बहरहाल अब देखने वाली बात यह है कि एनडीए में रहने की मजबूरी और नीतीश कुमार से दूरी के बीच उपेन्द्र कुशवाहा की राजनीति किस करवट बैठेगी.

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