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देवरिया ‘हॉरर होम’: सालभर से नहीं था लाइसेंस, फिर भी भेजी जाती थीं लड़कियां

लखनऊ

देवरिया में घटना सामने आने और इसके बाद मंत्री रीता बहुगुणा जोशी की सफाई के बाद सवाल उठ रहे हैं कि अगर जुलाई 2017 में इस संस्था को बंद करने के आदेश दे दिए गए थे तो आखिर यह आश्रय गृह अब तक चल कैसे रहा था? इस संस्था द्वारा की जा रही अनियमितता की वजह से मॉनीटरिंग कमिटी ने इस संस्था को संचालन के लिए उपयुक्त नहीं पाया था।

इसके बाद महिला एवं बाल विकास विभाग की तरफ से आदेश जारी हुए कि इस संस्था द्वारा संचालित आश्रय गृह को बंद करा दिया जाए और यहां रह रहीं लड़कियों और किशोरियों को किसी दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए। विभाग से आदेश मिलने के बाद सोमवार को सस्पेंड किए गए जिला अधिकारी सुजीत कुमार ने 19 सितंबर को पुलिस अधीक्षक को आदेश दिए थे कि यहां किसी भी लड़की को न भेजा जाए और न ही इस आश्रय गृह को चलने दिया जाए।

पुलिस इसे खाली कराने गई लेकिन वह आश्रय गृह खाली नहीं करा सकी और फिर मामला जहां का तहां रोक दिया गया। जिला अधिकारी ने न तो इसके बाद उस आदेश पर अमल कराने की कोई कोशिश की और न ही शासन को सूचित किया। वहीं, शासन स्तर पर भी लापरवाही हुई कि उन्होंने इस मामले में दोबारा यह तक देखना उचित नहीं समझा कि क्या आदेश पर अमल भी हुआ है या नहीं? दोनों तरफ की हीला हवाली और अधिकारियों की लापरवाही की वजह से यह आश्रय गृह चलता रहा और पिछले महीने तक बेसहारा लड़कियों को यहां लाया जाता रहा।

सीबीआई जांच में संस्था के कारनामों का हुआ था खुलासा
वर्ष 2014 में समाज कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित संस्थाओं में हुए 49 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया था। इसमें पूरे प्रदेश के सेल्टर होम्स की सीबीआई शुरू हुई थी। उस जांच के लपेटे में देवरिया की यह संस्था भी आ गई थी। जांच में यहां वित्तीय अनियमितता के साथ-साथ अन्य खामियां भी सामने आई थीं।

जून, 2017 में सीबीआई की रिपोर्ट पर प्रदेश की चार संस्थाओं को ब्लैक लिस्टेड किया गया था। जिसमें जिले की यह संस्था भी शामिल थी। उस दौरान शासन द्वारा जिलाधिकारी के पास बकायदा पत्र भेजकर यह निर्देशित किया गया कि भविष्य में किसी भी बच्ची को मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सेवा संस्थान में न भेजा जाए। मगर गिरजा त्रिपाठी के रसूख और आला अधिकारियों के निजी हितों के आगे छोटे अधिकारियों ने घुटने टेक दिए।

सभी लड़कियों का कराया गया मेडिकल, आज हो सकते हैं नए खुलासे
देवरिया के मां विंध्यवासिनी बालिका संरक्षण गृह में बालिकाओं से देह व्यापार कराने के मामले में मंगलवार को नए खुलासे हो सकते हैं. समाज कल्याण विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार और एडीजी अंजू गुप्ता की देखरेख में सोमवार रात सभी 24 लड़कियों का जिला महिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया. हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट को गुप्त रखा गया है. दो सदस्यीय टीम मंगलवार शाम को मेडिकल रिपोर्ट समेत अन्य जांच रिपोर्ट सीएम योगी आदित्यनाथ को सौंपेगी. कहा जा रहा है कि जांच दल की रिपोर्ट के बाद इस मामले की कई घिनौनी परतें खुलेंगी और कईयों पर गाज गिरेगी.

इससे पहले सोमवार शाम को पुलिस और जिला प्रशासन ने मां विंध्यवासिनी बालिका संरक्षण गृह को सील कर दिया और वहां से कई अहम दस्तावेज अपने साथ ले गई. दो सदस्यीय जांच टीम ने मुक्त कराई गईं लड़कियों से भी बात कर उनके बयान दर्ज किए हैं.

मुक्त कराए गए बच्चियों में से 13 नाबालिग
संरक्षण गृह से मुक्त कराई गई 24 लड़कियों में से 13 नाबालिग हैं. इनकी उम्र 18 वर्ष से कम है. वहीं 11 अन्य की आयु 18 या उससे अधिक पाई गई. इनमें से तीन लड़कियों को राजला स्थित नारी संरक्षण गृह से मुक्त कराया गया है, जबकि अन्य सभी स्टेशन रोड स्थित बालगृह बालिका में रह रही थीं.

पांच लड़कियों ने कहा गाड़ियों में ले जाई जाती थीं लड़कियां
सदर एसडीएम रामकेश यादव, डीपीओ प्रभात कुमार ने 20 लड़कियों और 3 लड़कों के बयान दर्ज किए. इनमें से पांच बच्चों ने कहा कि लड़कियों को लेने गाडियां आती थीं, जिनमें उन्हें भेजा जाता था.

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