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नक्सल लिंक: कांग्रेस बोली, क्या बीजेपी देश में जांच एजेंसी का काम कर रही?

नई दिल्ली

बीजेपी की तरफ से नक्सल लिंक का आरोप लगाए जाने के तुरंत बाद कांग्रेस ने पलटवार किया है। कांग्रेस ने कहा कि जिन तथाकथित पुलिस के कागज के आधार आरोप लगाया जा रहे हैं, वे बीजेपी के प्रवक्ता के पास कैसे आ जाते हैं। कांग्रेस ने सवाल किया कि क्या बीजेपी इस देश में जांच एजेंसी का काम कर रही है? कांग्रेस ने कहा कि यही अघोषित आपातकाल है जब पार्टी, सरकार और जांच एजेंसी का भेद खत्म हो गया है। कांग्रेस ने तेल कीमतों, राफेल डील और रूस के साथ ऑफसेट करार में सरकारी हस्तक्षेप जैसे तमाम मुद्दों पर भी मोदी सरकार पर हमला बोला है।

इससे पहले बीजेपी की तरफ से संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के ऊपर नक्सल लिंक के आरोप लगाए थे। संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता जयराम रमेश और दिग्विजय सिंह के कथित तौर पर नक्सली कनेक्शन हैं। कांग्रेस की तरफ से जवाब देने का जिम्मा पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने संभाला। मनीष तिवारी ने न केवल इन आरोपों का जवाब दिया बल्कि महंगे तेल, राफेल और रूस के साथ ए-103 असॉल्ट राइफलों के करार को लेकर भी निशाना साधा।

‘जांच से पहले बीजेपी के पास कागज आना ही अघोषित आपातकाल’
बीजेपी के आरोपों पर कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सवाल किया कि क्या बीजेपी इस देश में जांच एजेंसी बन गई है? पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘पुलिस के कागज बीजेपी के प्रवक्ता के पास कैसे आ जाते हैं? इसकी जांच होनी चाहिए। अगर किसी पुलिस फोर्स ने किसी अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया हो तो उसे सार्वजनिक डॉक्युमेंट समझा जा सकता है। जांच के दौरान जो तथाकथित कागज मिले हैं वे गलत हैं या सही हैं, ये प्रमाणित होने से पहले वह बीजेपी के पास चले आते हैं कि दुष्प्रचार के लिए इनका इस्तेमाल हो सके।’

नाजी सरकार से की मोदी सरकार तुलना
कांग्रेस नेता ने मोदी सरकार की तुलना जर्मनी की नाजी सरकार से करते हुए हमला बोला। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में ‘फासीवादी बीजेपी हाय हाय’ कहने पर ही 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भिजवा दिया। उन्होंने मोदी पर हमला करते हुए कहा, उन्होंने एक समारोह में कहा कि जो अनुशासन की बात करता है उसे तानाशाह करार दिया जाता है। अनुशासन बहुत ही पेचीदा शब्द है, क्योंकि अनुशासनवाद, तानाशाही और फासीवाद में बहुत ही कम अंतर है और ये शब्दों के मायाजाल में उलझाने की कोशिश है। ये अनुशासनवाद सीधे-सीधे फासीवाद का दूसरा नाम है।’ तमिलनाडु की घटना का जिक्र करते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि इससे एक बात स्पष्ट हो गई है कि इस देश में अघोषित आपातकाल है।

कांग्रेस नेता ने पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर कहा कि जब उच्च न्यायालय ने पूछा कि गिरफ्तार क्यों किया है तो उसका कोई ठोस जवाब नहीं आया। बीजेपी के आरोपों पर पलटवार करते हुए तिवारी ने मोदी सरकार को घेरते हुए कहा, ‘जर्मनी के नाजी हुक्मरान को इस बात में महारत हासिल थी कि किस तरह से प्रचार-प्रसार के माध्यम से किसी की छवि को धूमिल किया जाये।’

राफेल और रूस के साथ डील में दोहरा रवैया क्यों: मनीष तिवारी
कांग्रेस नेता ने फ्रांस के साथ राफेल डील के आधार पर रूस के साथ हो रही ए-103 असॉल्ट राइफलों की डील पर भी सवाल उठाए। उनसे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूछा गया कि रूस द्वारा इस डील में उद्योगपति अडाणी को पार्टनर बनाए जाने की मांग को मोदी सरकार ने मंजूरी नहीं दी है। इसपर मनीष तिवारी ने कहा, ‘एक तरफ राफेल मामले में सरकार कहती है कि कंपनियां ऑफसेट पार्टनर चुनने के लिये स्वतंत्र हैं, वहीं दूसरी तरफ रूसी कंपनी को ऐसा करने की मंजूरी नहीं दे रही। ये विरोधाभास क्यों हैं?’

पेट्रोल 39, डीजल 37.50 रुपये लीटर होना चाहिए: कांग्रेस
कांग्रेस ने तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर भी मोदी सरकार पर निशाना साधा। मनीष तिवारी ने कहा कि आज जो क्रूड की कीमतें हैं उसके हिसाब से पेट्रोल 39 रुपये और डीलज 37.50 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिकना चाहिए। मनीष तिवारी ने कहा, ‘सरकार दोगुने दाम पर तेल बेच रही है। अगर कीमत तुरंत नहीं घटाई गई तो कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक आंदोलन होगा।’

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