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बचाव में प्रेस ऑफिस का इस्तेमाल, घिरे CBI चीफ

नई दिल्ली

क्या सीबीआई निदेशक के खिलाफ शिकायत को उस संस्था के खिलाफ शिकायत माना जा सकता है जिसे वह हेड कर रहे हों? जब केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) उनके खिलाफ आरोपों की जांच कर रहा हो, तो क्या सीबीआई निदेशक अपने बचाव में एजेंसी प्रवक्ता के ऑफिस का इस्तेमाल कर अपनी बेगुनाही दिखा सकते हैं?

हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया ने सीबीआई के कई सेवानिवृत और मौजूदा अधिकारियों से इस संबंध में बात की। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा द्वारा एजेंसी के प्रवक्ता ऑफिस का इस्तेमाल सीवीसी की जांच की रिपोर्ट आने से पहले खुद को निर्दोष साबित करने में किये जाने पर इन अधिकारियों ने सवाल उठाया है। नाम न जाहिर करने की शर्त पर अधिकारियों ने कहा कि सीबीआई के दो शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ आरोपों से एजेंसी की शाख प्रभावित होगी।

आलोक वर्मा ने सीबीआई प्रवक्ता ऑफिस के जरिए शुक्रवार को अपने बचाव में बयान जारी किया था। वह इस बयान में 1984 बैच के गुजरात काडर के आईपीसी अधिकारी और उनके डेप्युटी राकेश अस्थाना द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर अपना बचाव कर रहे थे। अस्थाना का आरोप है कि आलोक वर्मा ने आरजेडी चीफ लालू प्रसाद के खिलाफ रेड रोकने की कोशिश की, जबकि वर्मा का दावा है कि सीबीआई खुद अस्थाना के खिलाफ आधे दर्जन मामले की जांच कर रही है। इसके बाद सीबीआई प्रवक्ता ने अस्थाना के केस को लेकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

एक अधिकारी ने कहा, ‘सीबीआई निदेशक सीबीआई प्रेस ऑफिस का इस्तेमाल अपने बचाव के लिए कर रहे हैं, जो कि संसाधनों चाहे मानवीय हो या वित्तीय, उसका दुरुपयोग है। अतीत में सीबीआई निदेशक पर आधिकारिक कार्यालय में आरोपी से मिलने के आरोप लगे थे, तब निदेशक ने अपनी व्यक्तिगत क्षमता के अनुसार बयान दिया था, न कि प्रेस ऑफिस का इस्तेमाल किया था।’

उन्होंने कहा, ‘हालांकि, सीबीआई निदेशक एजेंसी के एकमात्र अथॉरिटी हैं, तो इस बात की जांच की जरूरत है कि प्रेस ऑफिस उनका बचाव कर सकता है या नहीं और स्पेशल डायरेक्टर रैंक के दूसरे अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा सकता है या नहीं। अब सीवीसी को स्पष्ट करना है कि आलोक वर्मा ने अपने पद का दुरुपयोग किया है या नहीं।”

अधिकारी ने कहा, ‘इसके अतिरिक्त, कोई अपने मामले को कैसे जज कर सकता है। यह हितों के टकराव का गंभीर मामला है।’ एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘सीवीसी को यह स्पष्ट करना होगा कि आलोक वर्मा पर लगे आरोप को सीबीआई पर लगे आरोपों के रूप में देखना चाहिए या नहीं, क्योंकि यह एजेंसी के शाख से जुड़ा है।’ बता दें कि सीबीआई ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा था, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीबीआई निदेशक की छवि को खराब करने के लिए तथ्यों की बिना पुष्टि किए ही आधारहीन आरोप लगाए जा रहे हैं और संस्था के अधिकारियों को डराया जा रहा है।’

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