Tuesday , October 27 2020

बाल गृहों पर NCPCR की रिपोर्ट खौफनाक, हम असहाय: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली

भारत में बाल गृहों में बच्चों की स्थिति पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की रिपोर्ट को खौफनाक करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह असहाय है। दरअसल, मंगलवार को कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगर वह अधिकारियों को कोई निर्देश देता है तो इसे जुडिशल ऐक्टिविज़म (न्यायिक सक्रियतावाद) करार दे दिया जाएगा।

शेल्टर होम्स पर NCPCR की सोशल ऑडिट रिपोर्ट का जिक्र करते हुए जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 2,874 बाल गृहों में से सिर्फ 54 के लिए आयोग ने सकारात्मक टिप्पणी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 185 शेल्टर होम्स का ऑडिट किया गया उनमें से सिर्फ 19 के पास वहां रह रहे बच्चों का लेखा-जोखा था।

जस्टिस एस. अब्दुल नजीर और दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि यदि अदालत ने इस मामले में कुछ कहा तो उस पर ‘न्यायिक सक्रियतावाद’ के आरोप लगेंगे, भले ही अधिकारी अपना काम करने में दिलचस्पी नहीं लें और सिर्फ जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ें और इन बाल गृहों की मौजूदा स्थिति के लिए एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ते रहें।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि अधिकारियों ने ठीक से अपना काम किया होता तो बिहार के मुजफ्फरपुर कांड जैसी घटनाएं नहीं होतीं। आपको बता दें कि मुजफ्फरपुर में एक बाल गृह में कई लड़कियों से बलात्कार और यौन उत्पीड़न की घटना सामने आई है।

इस मामले में अदालत की मदद कर रही वकील अपर्णा भट ने कहा कि शीर्ष न्यायालय का आदेश न्यायिक सक्रियता नहीं हैं, क्योंकि बाल गृहों में रह रहे बच्चों की बेहतरी महत्वपूर्ण है। पीठ ने उनसे कहा, ‘क्या आपने एनसीपीसीआर की रिपोर्ट देखी है? यह खौफनाक है।’ इस मामले में अगली सुनवाई 20 सितंबर को होगी।

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