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बिहार : लगभग सभी शेल्टर होम्स में हो रहा यौन उत्पीड़न: रिपोर्ट

पटना

बिहार सरकार द्वारा टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की एक रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बिहार के लगभग सभी शेल्टर होम्स में लड़कियों का यौन उत्पीड़न हो रहा था, कहीं कम तो कहीं ज्यादा लेकिन सभी शेल्टर होम्स में यह समस्या पाई गई है। बता दें कि TISS ने इस साल अप्रैल महीने में अपनी रिपोर्ट समाज कल्याण विभाग को सौंपी थी।

100 पन्नों की इस रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रजेश ठाकुर द्वारा मुजफ्फरपुर में संचालित शेल्टर होम में यौन उत्पीड़न और हिंसा के मामले गंभीरता से सामने आए। कई लड़कियों ने उनके साथ रेप किए जाने और हिंसा के मामलों की शिकायत भी दर्ज कराई। बाद में जांच में यह सामने आया कि 34 लड़कियों के साथ दुष्कर्म किया गया था।

कई जगह नहीं मिल पाए डॉक्युमेंट्स
ओम साई फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे सेवा-कुटीर नामक शेल्टर होम में शारीरिक हिंसा और यौन उत्पीड़न के मामले सामने आए। यहां रह रहीं कई लड़कियों ने आरोप लगाया कि उन्हें काम दिलाने के नाम पर यहां लाया गया और उन्हें प्रताड़ित किया गया। हालांकि, इसके बारे में दस्तावेज नहीं मिले हैं।

वहीं मोतिहारी में ‘निर्देश’ नामक एनजीओ द्वारा लड़कों के लिए चलाए जा रहे चिल्ड्रन होम में रह रहे बच्चों ने भी शारीरिक हिंसा और यौन उत्पीड़न की शिकायत की। इसके अलावा यहां कम उम्र के बच्चों के साथ-साथ बड़े लोगों को भी रखा गया था। रिपोर्ट में आरोप कहा गया है कि हर उम्र वर्ग के बच्चों ने यौन उत्पीड़न की शिकायत की है। TISS की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शेल्टर होम में यौन उत्पीड़न और हिंसा के मामलों की शिकायतों के बारे स्थानीय लोगों द्वारा लिखे गए कई पत्र भी पाए गए हैं।

बच्चों को काम करने के लिए किया मजबूर
मुंगेर जिले में एनजीओ ‘पनाह’ द्वारा चलाए जा रहे लड़कों के चिल्ड्रन होम के बच्चों को सुपरिंटेंडेंट के क्वार्ट्रस के में काम करने को मजबूर किया जाता था और इनकार करने पर उनकी पिटाई की जाती थी। रिपोर्ट में कहा गया कि एक बच्चे के गाल पर तीन इंच लंबे चोट के निशान पाए गए हैं।

वहीं, संस्थाओं जैसे-सखी, नॉवेल्टी वेलफेयर सोसायटी में और भागलपुर, गया के साथ-साथ कैमूर के ग्राम स्वराज सेवा संस्थान के शेल्टर होम्स में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आईं। पटना की ‘नारी गुंजन’, मधुबनी की ‘आरवीईएसके’ और कैमूर की ‘ज्ञान भारती’ संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे शेल्टर होम्स में जिस तरह की स्थिति पाई गई, वह बेहद खतरनाक है।

बता दें कि TISS की इस रिपोर्ट के बाद यह मामला सामने आया था, जिसके बाद बिहार सरकारी मंत्री मंजू वर्मा पर खूब दबाव बना और उन्हें अपने पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था। इस मामले में बिहार सरकार की जमकर किरकिरी हुई थी।

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