Saturday , October 31 2020

भारत में बुरी स्थिति में बालगृह, 2,874 में से 54 ही कर रहे हैं नियमों का पालन

नई दिल्ली

राष्ट्रीय बाल अधिकार सुरक्षा समिति (एनसीपीसीआर) की एक सोशल ऑडिट रिपोर्ट में देश के बाल गृहों की भयावह स्थिति सामने आई है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की गई रिपोर्ट में सामने आया है कि ज्यादातर बाल पोषण गृह अनिवार्य़ मानकों और नियमों को अनदेखा कर रहे हैं और बहुत कम बाल गृह ही नियमों के मुताबिक चल रहे हैं।

एनसीपीसीआर ने एडवोकेट अनिंदिता पुजारी को सौंपी रिपोर्ट में कहा, ‘शुरुआती जांच में और हल्के विश्लेषण में ही यह बात सामने आई है कि बहुत कम बाल गृह हैं जो नियमों का पालन कर रहे हैं। कई जांच समितियों ने पाया है कि इनमें से बहुत कम ही कागज पर डेटा तैयार कर रहे हैं और किशोर न्याय (बाल पोषण व सुरक्षा) अधिनियम, 2015 के मानकों पर खरे उतरे हैं।’

सामने आए थे यौन हिंसा के मामले
बीते दिनों बिहार के मुजफ्फरपुर और उत्तर प्रदेश में बालिका गृह में यौन शोषण के मामले सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के ऐसे बालगृहों की ऑडिट रिपोर्ट मांगी थी। एनसीपीसीआर ने जस्टिस मदन बी लोकुर, एस अब्दुल नजीर और दीपक गुप्ता की बेंच को इस बारे में जानकारी दी।

केवल 54 को मिले पॉजिटिव रिव्यू
एनसीपीसीआर ने बताया, ‘उदाहरण के लिए अब तक जांच दलों द्वारा देखे गए कुल 2,874 बाल आश्रय गृहों में से केवल 54 को ही सभी छह जांच समितियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। बाकी सभी मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इसी तरह अब तक ऑडिट किए गए 185 शेल्टर होम्स में से केवल 19 में ही सभी बच्चों के 14 रेकॉर्ड्स मिले हैं जिनका होना जरूरी है।’

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