Tuesday , September 29 2020

महाराष्ट्र मराठा आरक्षण की राह आसान नहीं, यहां पेच

मुंबई

महाराष्ट्र सरकार ने रविवार को राज्य पिछड़ा आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है और मराठा समुदाय को आरक्षण देने का फैसला किया है लेकिन इस फैसले से सरकार को कानूनी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है। महाराष्ट्र के वरिष्ठ मंत्री और सरकारी अधिकारी दावा कर रहे हैं कि राज्य की कुल जनसंख्या में 30-32 फीसदी मराठा समुदाय के लोग हैं और इसलिए उन्हें 50 फीसदी का आनुपातिक आरक्षण प्राप्त होगा।

इसका मतलब यह होगा कि समुदाय को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) के तहत 15-16 फीसदी आरक्षण मिलेगा। लेकिन मराठा की उपजाति कुनबी समुदाय जिसे पिछड़ा माना जाता है, का दावा है कि पूरे राज्य की जनसंख्या में मराठाओं की भागीदारी केवल 30 में से सिर्फ 12 फीसदी ही है।

महाराष्ट्र में कुनबी सेना के मुखिया (वर्तमान में कांग्रेस के साथ) विश्वनाथ पाटिल ने कहा, ‘जनसंख्या में मराठाओं की 30 फीसदी हिस्सा वाला आंकड़ा गलत है। मराठाओं और राज्य सरकार ने कुनबी जनसंख्या की गिनती भी मराठा समुदाय के साथ की है। हम मराठा की उपजाति हैं और वे हमें अपना हिस्सा नहीं मानते हैं। अगर आप कुनबी को इस फिगर से हटाते हैं तो राज्य में मराठाओं की संख्या 12 फीसदी ही है।’

मामले को कानूनी रूप से मिलेगी चुनौती
उन्होंने कहा कि इसलिए ऐसे में, महाराष्ट्र सरकार मराठाओं को 15 से 16 फीसदी आरक्षण देती है तो मामले को कानूनी रूप से चुनौती मिलेगी। मराठा नेता रघुनाथ चित्रे पाटिल हालांकि इसे खारिज करते हैं कि उनकी संख्या सिर्फ 12 फीसदी ही है और दावा करते हैं कि कुनबी के बिना भी मराठाओं की गिनती राज्य की जनसंख्या की 16 से 18 फीसदी है।

कुनबी समुदाय पहले से ओबीसी कोटे में शामिल
कइस तरह के दावों और विरोधी दावों से मराठाओं के लिए आरक्षण अनिश्चित हो गया है। जानकारों की मानें तो, कुनबी को शामिल करते हुए मराठाओं को 16 फीसदी आरक्षण देना संभव नहीं है क्योंकि कुनबी पहले से ही ओबीसी कोटे में शामिल हैं और इसलिए वे मराठाओं के साथ एसईबीसी वर्ग में शामिल नहीं होना चाहेंगे क्योंकि इसे कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

विश्वनाथ पाटिल पूछते हैं, ‘हम ओबीसी श्रेणी में आते हैं, तो फिर हम क्यों नवनिर्मित एसईबीसी कैटिगरी में शामिल होंगे जब हम जानते हैं कि यह कानूनी रूप से मान्य नहीं होगा।’ महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर राज्य मराठों को 6-9 फीसदी आरक्षण प्रदान करता है, तो भी इसे कानूनी बाधा का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि इससे सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50 फीसदी आरक्षण सीमा पार हो जाएगी।

सरकार ने माना- यहां हैं कानूनी चुनौतियां
महाराष्ट्र सरकार के एक ऑफिशल ने स्वीकार किया कि यहां कई कानूनी चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें पता है कि चुनौतियां होंगी लेकिन हमें आशाा है कि मराठा इस बात को महसूस करेंगे कि हमने बिल पास कराने में ईमानदारी दिखाई है और अपना बेस्ट दिया है।’

बता दें कि महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने मराठा आरक्षण पर मुहर लगा दी है। शीतकालीन सत्र की पूर्व संध्या पर हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट को मंजूरी दे दी। इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ किया कि आयोग की तीनों सिफारिशें स्वीकार कर ली गई हैं। मराठा समाज को आरक्षण देने के लिए सरकार एसईबीसी (सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग) नाम से स्वतंत्र कोटा बनाएगी।

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